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कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए मतदान संपन्न, सभी 222 विधायकों ने डाले वोट

Karnataka: कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए मतदान संपन्न हो गया और सभी 222 विधायकों ने अपने वोट डाले। चुनाव अधिकारियों ने गुरुवार को ये जानकारी दी। कर्नाटक विधानसभा के सदस्यों ने विधान सौध में हुए चुनाव में मतदान किया। निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, मतगणना शाम पांच बजे शुरू होगी।

चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में कांग्रेस के थिप्पन्नप्पा कामकनूर, पी. वी. मोहन, बी. के. हरिप्रसाद (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष), शिवन्ना बी एस, और विनय कार्तिक प्रकाश तथा भाजपा के लिंगराज पाटिल और रघु आर और जेडीएस के गोविंदराजू शामिल हैं। ये चुनाव कराने की इसलिए जरूरत पड़ी क्योंकि विधान परिषद के सात सदस्यों का कार्यकाल 30 जून को समाप्त होने वाला है। इनमें कांग्रेस के नसीर अहमद, टिप्पन्नाप्पा और बी. के. हरिप्रसाद, भाजपा के एन. नागराजू (एमटीबी), प्रताप एस. नायक के. और सुनील वल्लयापुर तथा जेडीएस के गोविंदराजू शामिल हैं।

मतदान करने वाले प्रमुख नेताओं में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उप-मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव जीतने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 28 मतों की जरूरत है।

विधानसभा में संख्या बल के आधार पर, कांग्रेस और बीजेपी के क्रमशः चार और दो सीटें आसानी से जीतने की संभावना है। हालांकि, सातवीं सीट के लिए कड़ा मुकाबला है क्योंकि कांग्रेस और जेडीएस दोनों ने ही उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि ये सीट जीतने के लिए उनके पास जरूरी संख्या बल नहीं है।

इस बीच, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस बात को खारिज कर दिया कि सत्तारूढ़ कांग्रेस ने इस चुनाव के लिए कोई खास रणनीति अपनाई। साथ ही, उन्होंने विपक्षी दलों के विधायकों द्वारा कथित तौर पर ‘क्रॉस-वोटिंग’ किये जाने की जानकारी होने से भी इनकार किया।

मतदान के बाद, पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस ने सिर्फ अपने विधायकों से बातचीत की थी और यह सुनिश्चित किया कि पहली बार वोट देने वालों को मतदान प्रणाली के बारे में सही जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा, ‘‘मतदान संपन्न हो चुका है। हमने कोई खास रणनीति नहीं अपनाई। किसी रणनीति की जरूरत भी नहीं थी। विधायक समझदार और बुद्धिमान लोग हैं। वे जनता के प्रतिनिधि हैं... हमें कोई रणनीति बनाने की क्या जरूरत थी?’’

‘क्रॉस-वोटिंग’ की आशंका के मद्देनजर कांग्रेस और जेडीएस दोनों ने ही अपने विधायकों को शहर के बाहरी इलाकों में अलग-अलग रिजॉर्ट में ठहराया था। सत्तारूढ़ कांग्रेस, बीजेपी से निकाले गए विधायकों और निर्दलीय सदस्यों की मदद से सात में से पांच सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है। वहीं, जेडीएस अपने सहयोगी दल बीजेपी की मदद से एक सीट जीतने की उम्मीद कर रहा है।

बीजेपी से निकाले गए तीन विधायकों में से दो - एस टी सोमशेखर और शिवराम हेब्बार ने कहा कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट दिया है। संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि न तो बीजेपी और न ही जेडीएस ने वोट मांगने के लिए उनसे संपर्क किया, जबकि मुख्यमंत्री शिवकुमार ने उनसे संपर्क किया और कांग्रेस उम्मीदवार के लिए समर्थन मांगा।

सोमशेखर और हेब्बार बुधवार को उस रिजॉर्ट में नजर आये, जहां कांग्रेस विधायक डेरा डाले हुए थे। गुरुवार को भी वे कांग्रेस विधायकों के साथ देखे गए और शिवकुमार से भी मिले। हालांकि, बीजेपी से निकाले गए एक और सदस्य बासनगौड़ा पाटिल यतनाल ने कहा कि उन्होंने पार्टी के निर्देशों के अनुसार वोट दिया, क्योंकि वह इसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर विधानसभा चुनाव जीते थे।

उन्होंने विपक्ष के नेता आर. अशोक से भी मुलाकात की। इस बीच, जेडीएस के वरिष्ठ विधायक जी.टी. देवेगौड़ा, जो कुछ समय से पार्टी से दूरी बनाये हुए हैं, ने अलग से वोट डाला और पार्टी के दूसरे विधायकों के साथ मतदान करने के लिए नहीं आए, जिस कारण अटकलें शुरू हो गईं। देवेगौड़ा ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने अपनी ‘‘अंतरात्मा’’ की आवाज पर वोट दिया।