Tamil Nadu: तमिलनाडु की राजनीति में विजय की आमद बदलाव का संकेत है। राज्य के सियासी गलियारे में दशकों से दो द्रविड़ दलों - डीएमके और एआईएडीएमके - का बोलबाला रहा। अब पुराने समीकरणों को तीसरी ताकत चुनौती दे रही है। फिलहाल वो ताकत सत्ता के गलियारों में तो नहीं, लेकिन लोगों की सांस्कृतिक कल्पना में बसी है। ये ऐसी ताकत है, जिससे राज्य की अवाम पूरी तरह परिचित है। ये ताकत है, विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम की।
कई एग्जिट पोल ने अनुमान लगाया है कि टीवीके विधानसभा चुनाव में 120 का आंकड़ा पार करेगी, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को कम से कम 200 सीट पाने का भरोसा है। विजय ने टीवीके का गठन 2024 में किया था। उन्होंने पारदर्शी शासन, युवा सशक्तिकरण और राज्य की मौजूदा राजनीति से इतर होने का वादा किया।
2026 में उनका वादा चुनावी चुनौती में बदल गया। उन्होंने बिना कोई गठबंधन किए चुनाव में हाथ आजमाने का बीड़ा उठाया है। विजय का अभियान युवा भागीदारी, जमीनी स्तर पर लामबंदी और मतदाताओं के साथ सीधे भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित था।
चुनाव के नतीजे चार मई को आएंगे। सवाल है कि उसके बाद विजय की भूमिका क्या होगी? जीत किसी की और कितनी भी बड़ी हो, विजय की भूमिका निर्णायक होगी। टीवीके के लिए बड़ी संख्या में सीटें लाना या भारी वोट शेयर हासिल करना तमिलनाडु की राजनीति में बुनियादी बदलाव लाएगा।
टीवीके ने पहले ही सियासी समीकरण बदल दिया है। चुनाव को तिकोना मुकाबला बना दिया है। अभिनेता से नेता बने विजय ने साफ कर दिया है कि ये चुनाव "सिर्फ शुरुआत" है। उनका सियासी सफर लंबा है।
तमिलनाडु में पहली बार कोई फिल्मी हस्ती राजनीति में नहीं आ रही। ना ये आखिरी बार होगा, लेकिन विजय के सियासी सफर पर नजर रखना दिलचस्प होगा। हो सकता कि 2026 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला ना करे, लेकिन ये निश्चित रूप से उनके नए सफर की शुरुआत होगी।