संसद का विशेष सत्र आज हंगामेदार शुरुआत के साथ शुरू हुआ, जहां महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन अहम बिल पेश किए गए। इन प्रस्तावित बिलों में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 2029 से 33% आरक्षण देने की बात कही गई है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिल आज संसद में पेश किए गए। इन बिलों में महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 2029 से 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव है। इसके लिए तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। आज पहला दिन है।
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा- सरकार संविधान के विरोध में काम कर रही है। जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा। तब इसका मतलब नहीं है। इस पर शाह ने कहा- मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, इसका सवाल ही पैदा नहीं होता। फिर अखिलेश यादव ने कहा- पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है। मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या। इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है।
संशोधन बिल में लोकसभा सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव है। मौजूदा संख्या 543 है। राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 तक सीटें होंगी। सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन भी किया जाएगा। 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) बिल और परिसीमन विधेयक (संशोधन) बिल पेश किया, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 बिल पेश किया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को विपक्षी नेताओं के साथ मीटिंग की। कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है लेकिन लोकसभा में सीटें बढ़ाने के खिलाफ है। पूरा विपक्ष संसद में इसके खिलाफ वोट करेगा। मीटिंग में राहुल गांधी और टीएमसी, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट), AAP के नेता शामिल हुए।