मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आम आदमी को अपने काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और उसकी समस्या का समय पर समाधान हो, यही सुशासन की असली कसौटी है। नागरिक संतुष्टि ही किसी लोकसेवक का रिपोर्ट कार्ड है। उत्तर प्रदेश में प्रशासन को अधिक सक्षम, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने के लिए सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन, उपलब्धियों और बेहतर काम के उदाहरणों को वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने तीन प्रमुख पहलों पर जोर दिया। इनमें डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रुपाम) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करना, पंचायतों और नगर निकायों के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना और ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ यानी सही भूमिका के लिए सही व्यक्ति की तैनाती सुनिश्चित करना शामिल है।
‘ऑफिस-ऑफिस’ जैसी स्थिति से आम आदमी को मिलेगी मुक्ति
सीएम योगी ने कहा कि किसी बुजुर्ग को पेंशन के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें या किसी जरूरतमंद को समय पर समाधान न मिले, तो यह पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने ‘ऑफिस-ऑफिस’ धारावाहिक का उल्लेख करते हुए कहा कि आम नागरिक को अपने सामान्य काम के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भटकना नहीं चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समस्याओं को जानबूझकर लटकाना और जानकारी के अभाव में उनका समाधान नहीं कर पाना, दोनों ही प्रशासन के लिए गंभीर स्थिति हैं। एक अयोग्य व्यक्ति का जिम्मेदार पद पर बैठना और एक लापरवाह व्यक्ति का उस पद पर बने रहना भी खतरनाक है। इसलिए कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के साथ उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट करना और उनके काम का नियमित मूल्यांकन करना जरूरी है।
कार्य प्रदर्शन को एसीआर और प्रमोशन से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों, कार्य प्रदर्शन और बेहतर कार्यों के उदाहरणों को उनकी एसीआर तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। इससे कर्मचारियों की योग्यता के अनुसार जिम्मेदारी तय करने और सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि केवल डिग्री या नियुक्ति पत्र मिल जाने से कोई व्यक्ति दक्ष अधिकारी या कर्मचारी नहीं बन जाता। अपने काम की व्यावहारिक समझ, परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने और नागरिकों की जरूरतों को समझने की क्षमता भी जरूरी है।
रुपाम बनेगा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
सीएम योगी ने क्षमता विकास आयोग से रुपाम को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने में सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक शासन के तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में लोकसेवकों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीक सरकारी प्रक्रियाओं को सरल और तेज बना सकती है, लेकिन प्रशासन को संवेदनशील उसका सेवा भाव ही बनाएगा। इसलिए प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं, बल्कि बेहतर निर्णय लेना और नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं देना होना चाहिए।
पंचायतों और नगर निकायों के कर्मचारियों की भी बढ़ेगी क्षमता
मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों के कर्मचारियों के क्षमता विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पंचायतें और नगर निकाय शासन की बुनियादी इकाइयां हैं। इन्हें मजबूत और जवाबदेह बनाए बिना सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना मुश्किल है। सीएम योगी ने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए स्थानीय निकायों को नागरिक-केंद्रित बनाना होगा।
आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर 19.26 लाख से अधिक कार्मिक पंजीकृत
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अब तक करीब चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की सफलता का आकलन केवल पंजीकरण और पाठ्यक्रमों की संख्या से नहीं होना चाहिए। यह देखना जरूरी है कि प्रशिक्षण के बाद सरकारी प्रक्रियाएं कितनी सरल हुईं, निर्णय कितने बेहतर हुए और आम नागरिक को कितनी अच्छी सेवाएं मिलीं।
इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण का उदाहरण दिया
मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस के खिलाफ चलाए गए अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी बड़ी समस्या का समाधान केवल एक विभाग के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय, स्पष्ट जिम्मेदारी, प्रशिक्षित कर्मचारी और लगातार निगरानी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर विकास, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास सहित कई विभागों को अभियान से जोड़ा गया। आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों और एंबुलेंस सेवा की भूमिका तय की गई तथा कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। मुख्यमंत्री ने इस अनुभव को प्रशासनिक क्षमता विकास और विभागीय समन्वय का उदाहरण बताया।
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक कार्यसंस्कृति बदलने पर जोर
सीएम योगी ने कहा कि मिशन कर्मयोगी केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोक सेवा की कार्यसंस्कृति में बदलाव का अभियान है। उन्होंने प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों के लिए तैयार की गई 36 सेक्टोरल पॉलिसीज का उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर नीतियों के साथ उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने वाला सक्षम और जवाबदेह प्रशासन भी जरूरी है।
कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान, मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसमें आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।