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यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बना भारत, रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

भारत तेजी से यूरोप को हथियार निर्यात करने वाले दुनिया के तीसरे सबसे बड़े देशों में शामिल हो गया है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, यूरोप की ‘रीआर्म यूरोप’ पहल के चलते भारतीय गोला-बारूद और अन्य रक्षा उपकरणों की मांग बढ़ी है। वहीं, देश में रक्षा उत्पादन का आधार मजबूत होने से भारत की वैश्विक बाजार में पहुंच भी बढ़ी है।

रक्षा सचिव ने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। देश ने वित्तीय वर्ष के दौरान 38,424 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात किया, जो करीब 3.6 अरब यूरो के बराबर है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में यूरोप में भारतीय हथियारों की मांग में तेजी आई है। खास तौर पर तोप के गोले और छोटे-बड़े कैलिबर के गोला-बारूद का निर्यात बढ़ा है।

16 सरकारी कंपनियों से बढ़कर मजबूत हुआ रक्षा उद्योग

राजेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत का रक्षा उद्योग पहले मुख्य रूप से करीब 16 सरकारी कंपनियों पर निर्भर था। पिछले दस वर्षों में इस क्षेत्र का विस्तार हुआ है और अब इसमें निजी कंपनियां, छोटे-मध्यम उद्योग और स्टार्टअप भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

उनके मुताबिक, भारत में अब करीब 840 बड़ी और मध्यम कंपनियों के पास औद्योगिक लाइसेंस हैं। इसके अलावा लगभग 17,000 छोटे और मध्यम उद्यम भी रक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं। इस विविध औद्योगिक आधार से घरेलू उत्पादन और निर्यात को मजबूती मिली है। भारत में घरेलू रक्षा बिक्री का मूल्य करीब 17 अरब यूरो तक पहुंच गया है।

80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात

भारत अब दुनिया के 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है। इनमें तोप और गोला-बारूद के साथ बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट, छोटे हथियार और विभिन्न प्रकार की गन प्रणालियां शामिल हैं। रक्षा सचिव के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में भी भारतीय रक्षा उपकरणों की मांग है।

उन्होंने कहा कि सरकार हर साल रक्षा क्षेत्र में होने वाले पूंजीगत खर्च का 75 प्रतिशत देश के भीतर खर्च करने को प्राथमिकता देती है। यह खर्च सालाना करीब 20 से 25 अरब डॉलर के बीच होता है। साथ ही, भारतीय डिजाइन, विकास और निर्माण यानी आईडीडीएम को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि देश तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बन सके।

रूस पर निर्भरता कम, फ्रांस और अन्य देशों से सहयोग बढ़ा

रक्षा सचिव ने बताया कि भारत पहले रक्षा उपकरणों के लिए रूस पर काफी निर्भर था। हालांकि, समय के साथ इस निर्भरता में कमी आई है और भारत ने दूसरे देशों के साथ भी रक्षा साझेदारी बढ़ाई है।

उन्होंने फ्रांस को भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार बताया। उनके अनुसार, रूस के बाद फ्रांस भारत के रक्षा आयात में बड़ी हिस्सेदारी रखता है और इजरायल भी एक महत्वपूर्ण साझेदार है। भारत के ग्रीस और साइप्रस जैसे यूरोपीय देशों के साथ भी रणनीतिक संबंध मजबूत हो रहे हैं।

यूरोप में संयुक्त उद्यम स्थापित करने की तैयारी

राजेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत यूरोप के रक्षा खरीद कार्यक्रमों में अधिक भागीदारी करना चाहता है। इसके लिए भारतीय कंपनियां यूरोपीय देशों में संयुक्त उद्यम स्थापित कर सकती हैं। इसी तरह, यूरोपीय कंपनियां भी भारतीय रक्षा बाजार में अवसरों का लाभ उठाने के लिए भारत में संयुक्त उद्यम बना सकती हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के रक्षा खरीद कार्यक्रमों में भाग लेने वाली विदेशी कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ की शर्तों का पालन करना होगा। भारत में स्थानीय उत्पादन की न्यूनतम जरूरत 50 प्रतिशत है, जबकि यूरोप में यह करीब 25 प्रतिशत बताई गई है।

रक्षा सचिव के मुताबिक, भारत और यूरोप के बीच रक्षा साझेदारी को मजबूत करने से दोनों क्षेत्रों के निर्माताओं की आपूर्ति श्रृंखलाएं आपस में जुड़ सकेंगी। इससे उत्पादन बढ़ाने, तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भारत की भूमिका मजबूत करने में मदद मिल सकती है।