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सोनम वांगचुक ने खुद को बताया 'ऑनरेरी कॉकरोच', सरकार से युवाओं की आवाज सुनने की अपील

New Delhi: पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने शनिवार को स्वघोषित "कॉकरोच जनता पार्टी" (सीजेपी) द्वारा चलाए जा रहे ऑनलाइन "कॉकरोच" आंदोलन का समर्थन किया और खुद को "मानद कॉकरोच" बताते हुए सरकार से आग्रह किया कि वह युवाओं की डिजिटल अभिव्यक्ति को दबाने के बजाय उनकी चिंताओं पर ध्यान दें।

यह ऑनलाइन अभियान, जो व्यंग्य और कॉकरोच की छवि को दृढ़ता और असहमति के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करता है, हाल के दिनों में तब चर्चा में आया जब इसके संस्थापकों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई की शिकायत की, जिसमें अकाउंट सस्पेंशन और हैकिंग के आरोप शामिल हैं।

यह आंदोलन बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। एक साक्षात्कार में विवाद पर बोलते हुए वांगचुक ने कहा कि इस अभियान को लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि खतरे के रूप में।

उन्होंने कहा कि "हमारे युवाओं की ऐसी रचनात्मक अभिव्यक्ति चिंता या भय की बात नहीं है। सरकार को यह संदेश समझना चाहिए - संदेशवाहक को मत मारो। अगर हम संदेशवाहक को मार देंगे, तो संदेश खत्म नहीं होगा।" जब उनसे पूछा गया कि क्या वे औपचारिक रूप से आंदोलन में शामिल होंगे, तो वांगचुक ने हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया कि वे सदस्यता के योग्य नहीं हैं, लेकिन इसके संदेश से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

उन्होंने कहा, "कई जगहों से मुझे इस पर बोलने के लिए कहा गया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि मुझे भी सदस्य बन जाना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि मैं योग्य नहीं हूं - न तो मैं बेरोजगार हूं और न ही आलसी। इसलिए दुख की बात है कि मैं सदस्य नहीं हूं। लेकिन मैं खुद को ऑनरेरी कॉकरेच मानता हूं।"

अखबारों में छपने वाले राजनीतिक व्यंग्य और कार्टूनों से तुलना करते हुए वांगचुक ने कहा कि हास्य और प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त की गई असहमति एक वैध लोकतांत्रिक उपकरण है। वांगचुक ने आंदोलन के अहिंसक और कल्पनाशील स्वरूप की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश के युवाओं ने टकराव के बजाय डिजिटल रचनात्मकता को चुना है और यही बातें भारत को "विश्वगुरु" बनाती हैं।