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महाराष्ट्र जहरीली शराब कांड, 5 पुलिस अधिकारी सस्पेंड, मौत का आंकड़ा 21 पहुंचा

पुणे में जहरीली शराब पीने से दो और लोगों की मौत हो गई है. इसके साथ ही शराब कांड में मरने वालों की कुल संख्या अब 21 हो गई है. राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर रही है.  इस बीच पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे ने दापोड़ी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक समेत पांच पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. बता दें कि इस मामले में अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. ACP हीरे ने बताया कि मामले की फोरेंसिक जांच की जाएगी. 

ACP सचिन हीरे ने कहा, " दापोड़ी में नकली शराब पीने से लोगों की मौत हो गई.  हमने इस मामले में हत्या समेत कई सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज किया है.  शुरूआती जांच के बाद सप्लाई चेन में शामिल दो आरोपियों को हमने औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है. सप्लाई चेन से जुड़े लोग हमारी हिरासत में हैं. मामले की जांच चल रही है. जिन दो आरोपियों को हमने औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया है, उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा."  

उन्होंने बताया कि इनमें से एक आरोपी योगेश वानखेड़े सप्लाई चेन की बीच की कड़ी से जुड़ा था, जबकि दूसरा आरोपी प्रजापति है, जो पुणे से शराब की सप्लाई करता था. जांच में सामने आया है कि इन आरोपियों ने शराब में घातक रासायनिक पर्दार्थ मिलाए थे. एसीपी सचिन हीरे ने बताया कि हम जल्द ही पूरी सप्लाई चेन का पर्दाफाश करेंगे. हमने शराब के नमूने जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है.

वहीं, इस घटना पर सीएम देवेंद फडणवीस ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. राज्य सरकार और पुलिस की तरफ से सामने आई जानकारी के अनुसार, इस मामले में अभी तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच बढ़ने के साथ और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है. वानखेड़े के अलावा पुलिस ने करनैल सिंह विरका (73), उसकी पत्नी इंदरजीत कौर विरका (60), उसके बेटे गुरुमंगत सिंह विरका (45), राधेश्याम प्रजापति (35) और कल्पेश अग्रवाल (29) को गिरफ्तार किया है. इनके अलावा उत्पाद शुल्क विभाग ने आकाश जाधव, इरफान कुरेशी और आर्यन धोत्रे को गिरफ्तार किया है.

पिंपरी चिंचवाड़ के डिप्टी पुलिस कमिश्नर (जोन I) संदीप अटोले के मुताबिक, वानखेडे़ शराब में मेथनॉल मिलाता था, जिसे उसने एक ई-कॉमर्स साइट से मंगवाया था. मेथनॉल मिलाने का बाद उस शराब को उसने फुगेवाडी और हडपसर के विक्रेताओं को बेच दिया था. फुगेवाड़ी इलाके के अधिकतर पीड़ित दिहाड़ी मजदूर थे, जो एक मूवर्स एंड पैकर्स कंपनी में काम करते थे. पुलिस की जांच में सामने आया है कि ये मजदूर करनैल सिंह विरका से शराब खरीदते थे, जो कथित तौर पर 40 साल से भी अधिक समय से अपने घर से शराब बेच रहा था

वहीं, इस पूरे मामले पर अब NCP (SP) के विधायक रोहित पवार ने पुलिस विभाग पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और इस 'अवैध धंधे' के बीच कोई न कोई सांठगांठ जरूर है. जहरीली शराब कांड के इस मामले में न केवल पुलिस के खिलाफ, बल्कि राज्य के आबकारी विभाग के खिलाफ भी लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है.  नागरिकों ने इन दोनों विभागों के कामकाज को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं.