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ओडिशा में ह़ॉकी का गढ़ है सुंदरगढ़ शहर, देश को दिए कई अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी

ओडिशा का सुंदरगढ़, निचली पहाड़ियों और हरे-भरे पेड़ पौधों से घिरा मैदानी इलाका है। ये अपने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व के लिए मशहूर है। दो शताब्दी पहले अंग्रेजों ने ओडिशा के आदिवासी बहुल इलाके में हॉकी की शुरुआत की थी। तब से ये खेल यहां फलता-फूलता रहा। सुंदरगढ़ से कई अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी समय-समय पर निकलते रहे हैं। 

ओडिशा के लगभग 90 प्रतिशत हॉकी खिलाड़ी सुंदरगढ़ से आते हैं। इसमें भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और अब हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की, अमित रोहिदास, प्रबोध टिर्की, लाजरस बारला, बीरेंद्र लाकड़ा, नीलम संजीव ज़ेस, इग्नेस टिर्की से लेकर दीप ग्रेस एक्का, लिलिमा मिंज और नमिता टोप्पो तक शामिल हैं। ओडिशा सरकार ने 1985 में पानपोष में स्टेट स्पोर्ट्स हॉस्टल की स्थापना की थी। सेल हॉकी अकादमी 1992 में राउरकेला में स्थापित हुई।

पानपोश 199 ट्रेनिज के साथ सबसे बड़ा केंद्र है। वहीं सेल अकादमी में 32, स्टेट हॉस्टल में 37 और एसएआई केंद्र में 60 हैं। पानपोश ने 67 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए हैं, जिनमें ओलंपिक कांस्य पदक विजेता रोहिदास भी शामिल हैं। सेल ने देश को ओलंपिक कांस्य पदक विजेता बीरेंद्र लाका सहित 11 खिलाड़ी दिए हैं।

सुंदरगढ़ के ज्यादातर बच्चों का सपना राज्य सरकार के स्टेट स्पोर्ट्स हॉस्टल में आना है। जबकि दिलीप, प्रबोध, लाजरस, डिप्सन और अमित जैसे कुछ खिलाड़ी भारतीय टीम के लिए खेलते हैं। लेकिन जो राष्ट्रीय स्तर पर जगह नहीं बना पाते, वे हॉकी खेलकर सेना, अर्ध-सैन्य बलों, पुलिस, रेलवे, बैंकों सहित सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करते हैं।