Breaking News

बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका, शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे ने किया सरेंडर     |   सरेंडर के बाद कोर्ट में पेश हुए रमेश म्हात्रे, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए     |   सोनम वांगचुक केस: पत्नी ने SC का दरवाजा खटखटाया, सोमवार को जल्द सुनवाई की मांग     |   नागालैंड के मोन में भारी लैंडस्लाइड, 3 की मौत, 4 लोग अब भी मलबे में फंसे     |   लगातार पांचवीं बार महंगी हुई CNG, अहमदाबाद में ₹90.02 प्रति किलो हुई कीमत     |  

दिल्ली के निजी स्कूल को सरकार का नोटिस, सुरक्षा और वित्तीय अनियमितताओं पर होगी सख्त कार्रवाई

दिल्ली सरकार ने जनकपुरी के एक निजी स्कूल को गंभीर अनियमितताओं के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शिक्षा निदेशालय को स्कूल प्रबंधन और ट्रस्ट के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। स्कूल को जवाब देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है।शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई स्कूल बाल यौन शोषण जैसी गंभीर घटना छिपाता है, अवैध शाखाएं चलाता है और वित्तीय गड़बड़ियां करता है, तो सरकार जरूरत पड़ने पर स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में लेने और उसकी जमीन की लीज रद्द करने की सिफारिश भी करेगी।

सरकारी जांच में सामने आया कि 30 अप्रैल 2026 को नर्सरी की एक बच्ची के साथ स्कूल के प्री-प्राइमरी विंग में कथित तौर पर यौन शोषण हुआ था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इसकी जानकारी शिक्षा विभाग को नहीं दी, जो कानून का उल्लंघन है। जांच के दौरान पुलिस जब स्कूल पहुंची तो वहां लगे 64 CCTV कैमरे बंद मिले। बताया गया कि स्कूल ने जानबूझकर कैमरों का रखरखाव नहीं कराया था। जांच में यह भी पता चला कि स्कूल नारंग कॉलोनी के एक निजी रिहायशी भवन में बिना अनुमति नर्सरी और केजी की कक्षाएं चला रहा था। उस भवन के बेसमेंट का इस्तेमाल छोटे बच्चों की गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

इसके अलावा स्कूल में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी, चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी और POCSO प्रशिक्षित नोडल अधिकारी भी नहीं थे। सुरक्षा गार्डों का पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया गया था। स्कूल में पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण अभिभावकों को बच्चों के साथ दो से तीन पानी की बोतलें भेजनी पड़ती थीं। वहीं स्कूल का फायर एनओसी 2020 में समाप्त हो चुका था और उसका नवीनीकरण भी नहीं कराया गया।

वित्तीय जांच में पता चला कि कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड के करीब 6 करोड़ रुपये दूसरी शाखा में स्थानांतरित कर दिए गए। साथ ही स्कूल फंड से ट्रस्ट और प्रबंधन को कथित तौर पर अनधिकृत भुगतान भी किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों का वेतन चार-चार महीने की देरी से दिया जा रहा था, जबकि छात्रों की फीस 2025-26 सत्र में 15 प्रतिशत बढ़ा दी गई, जो हाईकोर्ट के निर्देशों के खिलाफ बताई गई है। इन गंभीर मामलों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूल से जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सरकार स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में लेने, जमीन की लीज रद्द कराने और POCSO व किशोर न्याय अधिनियम के तहत आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।