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असम में लगातार दूसरी बार हिमंता सरकार, NDA की भी लगेगी हैट्रिक

Assam: असम में मंगलवार को एक बार फिर सत्ता संभालने जा रहा बीजेपी नीत एनडीए लगातार तीसरी बार राज्य में शासन करने वाला पहला गैर-कांग्रेसी गठबंधन बन जाएगा। नामित मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी लगातार दूसरी बार शपथ लेने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बनकर राजनीतिक इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लेंगे। उत्तर-पूर्व के इस राज्य के कांग्रेस के गढ़ से बीजेपी का गढ़ बनने के साथ एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखा गया है।

क्षेत्रीय असम गण परिषद (एजीपी), जो पहले दो गैर-कांग्रेसी सरकारों का नेतृत्व कर चुकी है, अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा है। एनडीए लगातार तीसरी बार दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आया, जिसमें अकेले बीजेपी को 82 सीटें मिलीं।

उसके सहयोगी, एजीपी और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) को 126 सदस्यों वाली विधानसभा में 10-10 सीटें मिलीं।वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सिर्फ 19 सीटें जीत सकी। कांग्रेस 1978 तक राज्य में सबसे बड़ी ताकत थी, जब जनता पार्टी ने इसे पहली बार सत्ता से बाहर किया था।

हालांकि, जनता पार्टी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी। 1979 से 1985 तक के राजनीतिक रूप से उतार-चढ़ाव वाले समय में घुसपैठ के खिलाफ असम आंदोलन हुआ, जिसमें सत्ता कांग्रेस और राष्ट्रपति शासन के बीच झूलती रही। आंदोलन से उपजी एपीजी ने 1985 में अपनी पहली जीत में और फिर 1996 में सत्ता हासिल की।

कांग्रेस ने 2001 में फिर सरकार बनाई 2011 के चुनावों में लगातार तीसरी बार सत्ता में आकर उसने अपनी स्थिति मजबूत की, जब उसने अपने दम पर 78 सीट हासिल की थीं। कांग्रेस के अंतिम कार्यकाल में विधानसभा में सिर्फ पांच विधायक वाली बीजेपी ने 2016 में जबरदस्त बढ़त हासिल की, 60 सीटें जीतीं और एजीपी और बीपीएफ के साथ अपने गठबंधन को कुल 86 सीटों तक पहुंचाया।

साल 2021 के चुनाव में भी भाजपा ने 60 सीटों पर जीत हासिल की और राजग को 75 सीट मिलीं। हालांकि, इस चुनाव में उनकी सीटों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। बीजेपी ने 82 सीटें जीतीं, जो कांग्रेस को छोड़कर किसी भी पार्टी की अब तक की सबसे अधिक सीटें हैं, जबकि एनडीए गठबंधन के खाते में 102 विधायक आए।

सरमा ने सर्वानंद सोनोवाल से असम में दूसरी एनडीए सरकार का नेतृत्व संभाला था। उन्हें नई सरकार के लिए मुख्यमंत्री नामित किया गया है। एजीपी के प्रफुल्ल कुमार महंत के बाद, वे दूसरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले एकमात्र गैर-कांग्रेसी नेता होंगे। महंत पांच साल के अंतराल के बाद सत्ता में लौटे थे, वहीं सरमा लगातार दूसरी बार सरकार की कमान संभालेंगे। ये उपलब्धि अब तक सिर्फ कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के नाम थी।