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किसानों का शंभू बॉर्डर पर आंदोलन जारी रखने का फैसला, मना रहे 'ब्लैक डे'

फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और कृषि कर्ज माफी समेत अपनी मांगों को लेकर किसानों ने 'दिल्ली चलो मार्च' जारी रखने का फैसला किया है। फिलहाल हजारों किसान दिल्ली के करीब शंभू बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं।

किसानों का कहना है कि वे अपनी आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनैतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी समेत अपनी मांगों को मनवाने के लिए बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए 'दिल्ली चलो' मार्च कर रहे हैं, संयुक्त किसान मोर्चा 'दिल्ली चलो' मार्च का हिस्सा नहीं है।

सुरक्षा बलों के साथ झड़प में पंजाब के बठिंडा जिले के बालोके गांव के रहने वाले किसान शुभकरण सिंह की मौत हो गई थी, कई किसान घायल भी हुए। इसे देखते हुए प्रदर्शनकारी किसानों ने अपने मार्च को दो दिन के लिए रोक दिया था। उन्होंने शुक्रवार को ब्लैक डे मनाने का ऐलान किया था।

किसानों का कहना है कि "हमारा वरिष्ठ नेतृत्व जो भी आदेश देेंगे हम उसका पालन करेंगे। अगर वे हमें बल प्रयोग करने और सीमा में प्रवेश करने के लिए कहेंगे तो हम ऐसा ही करेंगे। हम निश्चित रूप से दिल्ली जाएंगे, चाहे हमें अपनी जान गंवानी पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम अपनी जीत के बाद ही घर वापस जाएंगे चाहे इसमें छह महीने लगें या एक साल। हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।''