Karnataka: उपजाऊ भूमि पर हरे-भरे खेतों से लहलहाता ये विशाल इलाका जल्द ही कंक्रीट की ऊंची इमारतों वाले टाउनशिप में बदल सकता है। पिछले हफ्ते कर्नाटक सरकार ने साउथ बेंगलुरु के बिदादी इलाके के पास प्रस्तावित 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप' के लिए जरूरी 7,000 एकड़ से ज्यादा जमीन में से 500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने के लिए पहला नोटिफिकेशन जारी किया है।
ये मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसे देश के पहले एआई-पावर्ड इंटीग्रेटेड टाउनशिप के तौर पर पेश किया जा रहा है। अधिग्रहण के नोटिफिकेशन के बाद किसानों का एक गुट सरकार का विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित जमीन उपजाऊ है और खेती के लिए बेहद जरूरी है।
राज्य की विपक्षी पार्टियां भी विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में उतर आईं है। दिलचस्प बात ये है कि ये प्रोजेक्ट सालों पहले मूल रूप से जेडीएस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी के कार्यकाल के दौरान प्रस्तावित किया गया था, लेकिन बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
उधर, बीजेपी भी आरोप लगा रही है कि राज्य सरकार टाउनशिप प्रोजेक्ट की आड़ में बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट डेवलपमेंट को बढ़ावा देना चाहती है। हालांकि, मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार प्रस्तावित टाउनशिप प्रोजेक्ट का पुरजोर बचाव कर रहे हैं।
उनका तर्क है कि दूसरे राज्यों में भी इसी तरह के बड़े टाउनशिप प्रोजेक्ट लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने आलोचकों पर इस मुद्दे का बेवजह राजनैतिकरण करने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री का समर्थन करने वालों में किसानों का एक वर्ग भी शामिल है, जिसने खुलकर इस प्रोजेक्ट का समर्थन किया है। उनका कहना है कि इससे इलाके में नौकरियां, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास होगा।
अधिकारियों के मुताबिक, इस शहरी विकास प्रोजेक्ट का मकसद बेंगलुरु की बढ़ती आबादी का दबाव कम करना है। इसके लिए एक ऐसी टाउनशिप बनाई जाएगी जो रिहायशी, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में आत्मनिर्भर हो। इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए इलाके के नौ गांवों में लगभग 7,481 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना होगा।