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Kerala: कोचीन हवाई अड्डे पर इबोला का प्रकोप बढ़ा, आपातकालीन बैठक के बाद बढ़ाई निगरानी

Kerala: प्रबंधन और एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के बीच आपातकालीन तैयारी को लेकर हुई बैठक के बाद शुक्रवार को सीआईएएल में अधिकारियों ने इबोला की निगरानी और एहतियाती उपायों को बढ़ा दिया। कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के प्रवक्ता ने बताया कि संभावित लक्षणों का शीघ्र पता लगाने और जन स्वास्थ्य प्रतिक्रिया उपायों को मजबूत करने के प्रयासों के तहत हवाई अड्डे पर 24 घंटे की निगरानी प्रणाली सक्रिय कर दी गई है।

बैठक के बाद जारी एक बयान में उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग, 21 दिन के यात्रा इतिहास का सत्यापन और सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म को अनिवार्य कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इबोला के प्रकोप को लेकर वैश्विक स्तर पर जारी चेतावनियों के मद्देनजर, कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान सहित दूसरे देशों से आने वाले यात्रियों को विशेष स्वास्थ्य निगरानी में रखा जाएगा।

बैठक में एयरपोर्ट निदेशक मनु जी, एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर डॉ. राफेल टेडी, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. आयशा मनिका के ए और सीआईएसएफ, आव्रजन, एयरलाइंस, एयरपोर्ट अथॉरिटी और सीआईएएल के प्रतिनिधि मौजूद थे। एपीएचओ की जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अन्ना ने इबोला की रोकथाम, मामलों की पहचान और संक्रमण नियंत्रण उपायों से संबंधित तैयारी और प्रतिक्रिया योजना पेश की।

अधिकारियों ने बताया कि इबोला का कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। बुंडीबुग्यो इबोला वायरस (बीडीबीवी) इबोला वायरस की पांच ज्ञात प्रजातियों में से एक है। अधिकारियों ने कहा, "यह बीमारी जानवरों से मनुष्यों में और संक्रमित व्यक्तियों के शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से भी फैल सकती है।"

अधिकारियों ने बताया कि इन्क्यूबेशन पीरियड 2 से 21 दिनों तक होता है, जबकि बुखार, गले में खराश, सिरदर्द और फ्लू जैसे लक्षण संक्रमण के शुरुआती संकेतों में शामिल हैं। अधिकारियों ने आगे कहा, "मृत्यु दर 30 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है।"

तैयारी योजना के तहत एर्नाकुलम जनरल अस्पताल, कलामासेरी सरकारी अस्पताल और अलुवा जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था की गई है। बैठक में संक्रमण की रोकथाम के सख्त उपायों पर भी जोर दिया गया, जिनमें तीन परत वाले मास्क का उपयोग और साबुन से नियमित रूप से हाथ धोना शामिल है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वेबसाइट के अनुसार, इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है जो मनुष्यों और अन्य प्राइमेट्स को प्रभावित करती है।