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देश की पहली राज्य स्तरीय फोरेस्ट फायर मॉक ड्रिल आइजोल में आयोजित की गई

मिजोरम ने डर्टलांग लीटन के पास पहला राज्य स्तरीय फोरेस्ट फायर मॉक ड्रिल आयोजित किया। इस अभ्यास में भूस्खलन, रोड ब्लॉकेज और दूसरे हालातों से निपटने की प्रैक्टिस की गई। राज्य ने आपदा से निपटने के लिए तैयारी के तौर पर ये मॉक ड्रिल किया।

मॉक ड्रिल में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), आइजोल जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की त्वरित प्रतिक्रिया टीम (क्यूआरटी), खेल और युवा सेवा विभाग की साहसिक विंग औरयंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) डर्टलैंग लीटन शाखा सहित कई प्रतिक्रिया टीमों की काबिलियत का परीक्षण किया गया।

ड्रिल के दौरान बचाव दल ने हताहतों को निकालने के लिए मिलकर काम किया। उन्हें डर्टलांग में सिनोड अस्पताल और सेलेसिह में पशु चिकित्सा अस्पताल पहुंचाया। आइजोल वन प्रभाग के जिला वन अधिकारी (डीएफओ) ने कमांड पोस्ट से प्रतिक्रिया की देखरेख करते हुए साइट इंसीडेंट कमांडर के रूप में काम किया।

वास्तविक समय पर मूल्यांकन पक्का करने के लिए, पूरे अभ्यास को लाइव-स्ट्रीम किया गया। इसमें अहम बिंदुओं पर ऑब्जर्वर तैनात थे। ड्रिल के बाद के डीब्रीफिंग सेशन में प्रतिक्रिया रणनीतियों में सुधार पर गौर किया गया। अधिकारियों ने असल जीवन में जंगल की आग की घटनाओं से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर हताहत प्रबंधन, अल्पाइन बचाव मिशन और अंतर-एजेंसी साथ मिलकर के काम करने के महत्व पर जोर दिया।

मिजोरम उन राज्यों में से एक है जहां सबसे ज्यादा जंगल में आग लगने की आशंका होती है। भारत सरकार ने 19 राज्यों को जंगल की आग के प्रति ज्यादातर संवेदनशील के रूप में वर्गीकृत किया है, जिसमें मिजोरम को उच्चतम जोखिम स्तर पर रखा गया है।

राज्य के ढलानदार इलाके, शुष्क हालात और बढ़ते तापमान को देखते हुए, विशेषज्ञों ने जंगल की आग प्रबंधन को प्राथमिकता नहीं देने पर विनाशकारी नतीजों की चेतावनी दी है। इस ड्रिल में पुलिस, यातायात प्राधिकरण, सुरक्षा बल और विशेष आपदा प्रतिक्रिया टीमें शामिल हुईं।