केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने साइबर खतरों से निपटने के लिए 5,000 साइबर कमांडो तैयार करने का अभियान शुरू किया है। इसका मकसद जवानों को डिजिटल दुनिया में बढ़ रहे साइबर अपराधों और ऑनलाइन हमलों से निपटने के लिए प्रशिक्षित करना है। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत 8 जून से चेन्नई के IIT मद्रास प्रवर्तक में हुई है। छह हफ्ते तक चलने वाले इस कोर्स में CISF के 35 जवानों का पहला बैच हिस्सा ले रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान जवानों को नेटवर्क और क्लाउड सिस्टम, डिजिटल जांच (फॉरेंसिक), साइबर हमलों की पहचान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और साइबर कानूनों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही साइबर हमलों की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। CISF का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य जवानों को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाना है, ताकि वे भविष्य में आने वाली साइबर चुनौतियों का आसानी से सामना कर सकें।
बल ने बताया कि अब तक 1,600 से ज्यादा CISF कर्मी देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों से साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण ले चुके हैं। इनमें राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU), पुणे का DIAT और हैदराबाद की राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (NPA) शामिल हैं। CISF देश के कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों जैसे हवाई अड्डों, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों, बंदरगाहों, मेट्रो नेटवर्क और सरकारी इमारतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है। इसलिए बदलते समय के साथ साइबर सुरक्षा को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है। CISF का कहना है कि भविष्य में वह सरकारी और निजी संस्थानों को साइबर सुरक्षा से जुड़ी सलाह और सेवाएं भी उपलब्ध करा सकता है। इससे CISF सिर्फ भौतिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।