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मराठा आरक्षण के लिए प्रदर्शन पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, 2 सितंबर तक शहर की सभी सड़कें खाली करने को कहा

Mumbai: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि मराठा अधिकार और आरक्षण की मांग कर रहे मनोज जरांगे के नेतृत्व में चल रहे मराठा आरक्षण आंदोलन के कारण पूरा शहर थम सा गया है और यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा है और इसमें सभी शर्तों का उल्लंघन हुआ है। हाईकोर्ट ने मुंबई में सामान्य स्थिति बहाल करने का आग्रह किया। जरांगे और उनके समर्थकों को स्थिति सुधारने और मंगलवार दोपहर तक सभी सड़कें खाली कराने को कहा।

मनोज जरांगे शुक्रवार से दक्षिण मुंबई के आज़ाद मैदान में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनके समर्थकों ने दावा किया कि उन्होंने सोमवार से पानी पीना भी बंद कर दिया है।

न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अखंड की पीठ ने एक विशेष सुनवाई में कहा कि प्रदर्शनकारी आज़ाद मैदान जो आंदोलन के लिए निर्धारित स्थल है – पर नहीं रुके हैं और उन्होंने दक्षिण मुंबई के कई महत्वपूर्ण इलाकों को अवरुद्ध कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा, "स्थिति गंभीर है और मुंबई शहर लगभग ठप्प हो गया है।"

अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारी छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) और चर्चगेट रेलवे स्टेशनों, मरीन ड्राइव प्रोमेनेड और यहां तक कि उच्च न्यायालय भवन जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर जमा हो गए हैं। अदालत ने कहा कि आंदोलन अब शांतिपूर्ण नहीं रहा है और प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन की सभी शर्तों को तोड़ दिया है।

हाई कोर्ट की पीठ ने कहा, "हम जरांगे और उनके समर्थकों को स्थिति को तुरंत सुधारने और यह सुनिश्चित करने का अवसर दे रहे हैं कि मंगलवार दोपहर तक सड़कें खाली और साफ़ कर दी जाएं।" अदालत ने कहा कि चूंकि जरांगे और उनके समर्थकों ने प्रथम दृष्टया शर्तों का उल्लंघन किया है और चूंकि उनके पास विरोध प्रदर्शन जारी रखने की वैध अनुमति नहीं है, इसलिए वह राज्य सरकार से अपेक्षा करती है कि वह उचित कदम उठाकर कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करे।

सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि अब से कोई भी प्रदर्शनकारी शहर में प्रवेश न करे। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार के लिए निर्धारित करते हुए कहा कि यदि तब तक जरांगे की तबीयत बिगड़ती है, तो सरकार उन्हें चिकित्सा सहायता प्रदान करेगी। महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने अदालत को बताया कि आज़ाद मैदान में विरोध प्रदर्शन की अनुमति केवल 29 अगस्त तक दी गई थी।

उन्होंने कहा कि जरांगे और उनके समर्थकों ने हर शर्त और वचन का उल्लंघन किया है। पीठ ने कहा कि जरांगे का पुलिस को दिया गया यह आश्वासन कि वह जनसभा, आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के नियमों में निर्धारित सभी शर्तों का पालन करेंगे, केवल "दिखावटी" है।

पीठ ने कहा, "हम देख सकते हैं कि विरोध प्रदर्शन कितना शांतिपूर्ण है। उच्च न्यायालय की इमारत को घेर लिया गया है। न्यायाधीशों और वकीलों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए हैं। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की कारों को आज रोक दिया गया और उन्हें अदालत आने से रोक दिया गया। पूरा शहर जाम कर दिया गया है।"

अदालत ने पूछा कि अगर जरांगे का यह बयान कि लाखों और प्रदर्शनकारी आएंगे, तो राज्य सरकार इस स्थिति से निपटने की क्या योजना बना रही है। गणेश उत्सव की वजह से 27 अगस्त से उच्च न्यायालय में छुट्टी चल रही हैं। मंगलवार को फिर से कार्य शुरू होगा। विरोध प्रदर्शनों के बेकाबू होने और शहर को ठप कर देने पर चिंता जताते हुए कई याचिकाएं दायर की गईं, जिसके बाद पीठ ने इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू की।