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बिहार की प्राचीन शिल्प कला को मिला जीआई टैग, कारीगरों ने जताई खुशी

Bihar: बिहार में भले ही आज गया जी के पत्थरकट्टी गांव में मशीनों से पत्थर तराशे जा रहे हों लेकिन इस जगह की पहचान पीढ़ियों से चले आ रहे उन कारीगरों ने बनाई है जिनके पास सिर्फ हथौड़े, छेनी और हुनर ​​ही उनके असली औजार हुआ करते थे।

सदियों पुरानी इस शिल्प कला को जीआई टैग मिलने के बाद, पत्थरकट्टी गांव की पत्थर तराशने की कला को ग्लोबल मार्केट में अलग पहचान मिली है। बौद्ध, जैन और हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के लिए मशहूर पत्थरकट्टी गांव की ये शिल्पकला अपनी उत्कृष्टता और टिकाऊपन के लिए मशहूर है।

कारीगरों को उम्मीद है कि जीआई टैग मिलने से बाजार में इसकी मांग बढ़ेगी, आजीविका में सुधार होगा और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की ओर लोग आकर्षित होंगे। पत्थरकट्टी के कारीगरों को उम्मीद है कि उनकी सदियों पुरानी कला को बेहतर बाजार और पहचान मिलेगी। साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए उनका भविष्य सुरक्षित होगा।