उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के राजा बाग गांव के लोगों के लिए अंधेरा ही जीवन का हिस्सा था। लेकिन 15 अगस्त को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न से एक हफ्ते पहले सब कुछ बदल गया। लगभग आठ दशकों तक बिना बिजली के रहने के बाद गांववालों को आखिरकार सूरज ढलने के बाद रोशनी में बैठने का एहसास हुआ, जब उनकी जिंदगी में पहली बार बल्ब से उजाला हुआ।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि “हमारे यहां बहुत समस्या कठिन थी। कोई लाइट, बत्ती की व्यवस्था नहीं थी। हमें एक हफ्ता हो गया लाइट आई है बत्ती, अब सुकून हुआ पंखा, बिजली हर चीज का सुकून है। लड़का अंधेरे में पड़ते रहे। वो अंधेरे में हम लोग खाना खाते-पीते उम्र बीत गई। लाइट आने से हमारे यहां बहुत फायदा है। सब लड़का पढ़ें तो पंखा, कूलर की हवा खाते हैं और सबको सुकून है लाइट से।”
सरकार की सौभाग्य योजना के तहत गांव के लोगों को बिजली के कनेक्शन दिए गए, इस योजना के तहत सरकार की ओर से हाल ही में गांव में बिजली का बुनियादी ढांचा तैयार किया गया और घरों को बिजली के कनेक्शन दिए गए।
यूपीएसईबी कार्यकारी अभियंता ने बताया कि “यह राजा बाग गांव सिद्घौर इलाके में स्थित है। वहां पर ज्ञात हुआ था कि 70 सालों से बिजली नहीं पहुंची है। पिछले साल भारत सरकार की योजना सौभाग्य योजना के फेज थर्ड के अंतर्गत चयनित किया गया है। चयनित करके भेजा गया वो स्वीकृत हो गया। अभी वहां पर लाइट का निर्माण कर राजा बाग के जो भी घर थे उनको कनेक्शन दिया गया है। सभी उपभोक्ता बहुत खुश हैं।”
भले ही आजादी के आठ दशक बाद ऐसा हुआ हो, लेकिन राजा बाग गांव में रहने वाले लोगों के लिए बिजली का आना महज एक स्विच दबाने भर के मसले से कहीं ज्यादा अहम है। इसका मतलब ज्यादा रोशन घर, सुकून भरी रातें, सुरक्षित माहौल और आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर पर्यावरण जैसी तमाम बातें भी शामिल हैं।