भारत की मेजबानी में 11 से 13 सितंबर तक भारत मंडपम में तीन दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन में खाद्य, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपदा न्यूनीकरण और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं में सामूहिक लचीलापन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे ये समूह खंडित भू-राजनीतिक माहौल में आगे बढ़ने के लिए एक प्रभावी आधार बन सके। नयी दिल्ली में ये शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी) और ट्रंप प्रशासन की व्यापार और शुल्क नीतियों के बुरे असर का सामना कर रही है।
इस अहम सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल हैं। शिखर सम्मेलन में अब सिर्फ दो दिन बचे हैं, लेकिन ये साफ नहीं है कि समूह के सदस्य देश किसी संयुक्त बयान पर आम सहमति बना पाए हैं या नहीं, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं। ये समूह आम सहमति के आधार पर काम करता है।
मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से मिलकर बने ब्रिक्स का 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हुए, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ। बेलारूस, बॉलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने थे। ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के तौर पर उभरा है, क्योंकि ये दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा हैं।
इस समूह की भारत की अध्यक्षता चार स्तंभों- लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित है। लचीलापन स्तंभ के तहत भारत स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य, ऊर्जा, आपदा जोखिम कम करने और आपूर्ति शृंखला जैसे क्षेत्रों में सामूहिक सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करता रहा। उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी शिखर सम्मेलन के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल होगा। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ की थीम से निर्देशित है। ये थीम ‘मानवता सर्वोपरि’ की भावना में निहित जन-केंद्रित रुख के भारत के दृष्टिकोण को दर्शाती है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन क्षेत्रों के अलावा, नेतागण साझा प्राथमिकताओं पर ब्रिक्स के भीतर सहयोग मजबूत करने के लिए विचार-विमर्श करेंगे और पारस्परिक महत्व के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपना नजरिया साझा करेंगे। इस साल भारत की अध्यक्षता में, देश भर के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इनका मकसद ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को तीन मुख्य आधारों-राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच आपसी संपर्क- पर और मजबूत करना है।
भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 तथा 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने एक जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ये शिखर सम्मेलन शनिवार को दोपहर 2:35 बजे ब्रिक्स सदस्य देशों के लिए ‘‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’’ विषय पर बंद कमरे के सत्र के साथ शुरू होगा। इस सत्र के बाद, नेता ‘भारत इनोवेट्स एग्जिबिशन’ का दौरा करेंगे, जो शाम 4:25 बजे शुरू होगी। शाम 5:05 बजे, सभी नेता शिखर सम्मेलन की जगह -- भारत मंडपम -- के लॉन में ‘फैमिली फोटो’ के लिए एकत्र होंगे और उसके बाद मिलकर पौधारोपण कार्यक्रम में शामिल होंगे।
पहले दिन के कार्यक्रमों का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शाम 7:30 बजे आयोजित एक शानदार रात्रिभोज के साथ होगा। रविवार को ब्रिक्स सदस्य देशों, सहयोगी देशों और ‘आउटरीच’ के लिए आमंत्रित नेताओं का आगमन सुबह 9:55 बजे से शुरू होगा, जिसके बाद सुबह 10:35 बजे आधिकारिक सामूहिक तस्वीर ली जाएगी। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, ‘‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता: समावेशी वैश्विक प्रगति के लिए भविष्य को आकार देना’’ विषयक खुला सत्र सुबह 10:50 बजे शुरू होगा। 'नयी दिल्ली घोषणापत्र' जारी किए जाने के साथ इस शिखर सम्मेलन का समापन होगा।