Kerala: सबरीमाला से चार किलोग्राम सोना गायब होने के मुद्दे पर चर्चा के लिए शुक्रवार को केरल विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव की मांग को अध्यक्ष ए. एन. शमशीर ने खारिज कर दिया। इसके बाद कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्ष ने सदन से वॉक आउट कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने ये कहते हुए प्रस्ताव को अनुमति देने से इनकार कर दिया कि सदन संचालन प्रक्रिया नियमों के अनुसार, न्यायालय में विचाराधीन मामलों या मुद्दों पर सदन में चर्चा नहीं की जा सकती।
राज्य विधानसभा में नेता विपक्ष वी. डी. सतीशन ने कहा कि सदन में विचाराधीन मुद्दों पर चर्चा की परिपाटी रही है, जिस पर अध्यक्ष ने कहा, ‘‘परिपाटी नियमों से ऊपर नहीं रखी जा सकती और किसी को तो बिल्ली के गले में घंटी बांधनी ही होगी। मैं अभी बिल्ली के गले में घंटी बांध रहा हूं।’’ सतीशन ने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाया गया मुद्दा गंभीर है क्योंकि उच्च न्यायालय ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अयप्पा भक्त सबरीमाला से चार किलोग्राम से ज्यादा सोना गायब होने से निराश हैं।
नेता विपक्ष ने कहा, ‘‘चूंकि सदन में इतने गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने की अनुमति नहीं दी गई, इसलिए हम विरोध स्वरूप सदन से बहिर्गमन कर रहे हैं।’’ विपक्ष के सदन से बाहर जाने के दौरान मंत्रियों एम. बी. राजेश और पी. राजीव ने आरोप लगाया कि ये प्रस्ताव यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ मिलकर 20 सितंबर को होने वाले ‘ग्लोबल अयप्पा संगमम’ को रोकने के प्रयासों का हिस्सा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सम्मेलन को विफल करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाने सहित सभी प्रयास विफल होने के बाद विपक्ष ने गायब सोने के मुद्दे को उठाने की कोशिश कर एक नई रणनीति अपनाई है।
साल 2019 में सबरीमला गर्भगृह के सामने स्थित ‘द्वारपालक’ (रक्षक देवता) की मूर्तियों पर चढ़ी सोने की परत वाली तांबे की प्लेटों को हटाए जाने के समय वजन में हुई कमी को केरल उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लिया और बुधवार को इस मामले में सतर्कता जांच के आदेश दिए।
अदालत ने कहा था कि जब ये आवरण (क्लैडिंग) सोने की परत चढ़ाने के लिए भेजा गया तो उसके वजन में 4.541 किलोग्राम की एक स्पष्ट और अस्पष्टीकृत कमी पाई गई, जो कि सन्निधानम में मूर्तियों से हटाए जाने के समय दर्ज वजन की तुलना में थी।