बेंगलुरु: Bureau की ‘India Fraud Report 2026’ में खुलासा हुआ है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में फ्रॉड का तरीका तेजी से बदल रहा है और अब “म्यूल नेटवर्क” सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है।
48% भारतीय कंपनियों ने म्यूल नेटवर्क को सबसे मुश्किल फ्रॉड बताया है, जो फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग (33%) से भी आगे है। ये नेटवर्क कई जुड़े हुए अकाउंट्स में पैसे को बांटकर ट्रांजैक्शन को वैध दिखाते हैं, जिससे इन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। Reserve Bank of India की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग सेक्टर में फ्रॉड से नुकसान बढ़कर 36,014 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अब फ्रॉड पहले से ज्यादा तेज, संगठित और “इंडस्ट्रियल” हो चुका है। रियल-टाइम पेमेंट, इंस्टेंट ऑनबोर्डिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की जा रही है। एक बड़ी चुनौती “फॉल्स पॉजिटिव” भी है—करीब 58% कंपनियां असली ग्राहकों को ही संदिग्ध मानकर समय बर्बाद कर रही हैं, जबकि असली फ्रॉड पकड़ से बाहर रह जाते हैं।
2025 में फ्रॉड का सबसे बड़ा एंट्री पॉइंट “आइडेंटिटी” बना, जहां फर्जी डॉक्यूमेंट, नकली फोटो और AI से बनाई गई पहचान का इस्तेमाल हो रहा है। “Fraud-as-a-Service” के जरिए डार्क वेब पर ऐसे टूल्स आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे कम स्किल वाले लोग भी बड़े फ्रॉड कर पा रहे हैं।
Bureau के CTO Sandesh GS ने कहा कि आज फ्रॉड को समझने के लिए सिर्फ एक प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क के डेटा को जोड़कर देखना जरूरी है। एक मामले में 2700 से ज्यादा जुड़े यूजर्स का नेटवर्क पकड़ा गया, जो अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मिलकर फ्रॉड कर रहा था। इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए कंपनियों को AI, डिवाइस डेटा, बिहेवियर एनालिसिस और ग्राफ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना होगा, ताकि ऐसे संगठित फ्रॉड नेटवर्क्स को समय रहते पकड़ा जा सके।