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फिर उठा वैष्णो देवी रोपवे विवाद, कटरा पहुंची उच्चस्तरीय कमेटी, कई प्रतिनिधिमंडलों से की मुलाकात

जम्मू कश्मीर उप-राज्यपाल द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने प्रस्तावित माता वैष्णो देवी रोपवे परियोजना को लेकर छिड़े विवाद के बीच सलाह-मश्विरा करने के लिए कटरा का दौरा किया। कई प्रतिनिधिमंडलों ने समिति के सदस्यों से मुलाकात कर अपनी राय उनके सामने रखी। इनमें से कुछ समूहों ने खुले तौर पर परियोजना का समर्थन किया और रोपवे को कटरा तक बढ़ाने की मांग की।

फिलहाल, प्रस्तावित रोपवे परियोजना ट्रेकिंग मार्ग पर ताराकोटे और सांझी छत के बीच ढाई किलोमीटर के खंड तक ही सीमित है। वैष्णो देवी से बीजेपी के मौजूदा विधायक भी इस परियोजना के समर्थकों में शामिल हैं। कटरा में व्यापारियों, होटल मालिकों, टट्टू मालिकों और अन्य लोगों की रोजीरोटी पर इस रोपवे का असर न पड़े, इसका भी ध्यान रखा गया है।

रोपवे परियोजना का विरोध करने वालों में एक स्थानीय कांग्रेस नेता भी शामिल हैं। उनका दावा है कि रोपवे में तीर्थस्थल पर आने वाले लगभग सभी श्रद्धालुओं को ले जाने की क्षमता होगी, जिससे तीर्थयात्रा मार्ग पर निर्भर इलाके के लोगों की रोजीरोटी खत्म हो जाएगी। इलाके के व्यापारियों, होटल मालिकों और कई श्रमिक संघों के नेताओं ने कहा कि वे रोपवे परियोजना का पुरजोर विरोध करेंगे।

उनकी दलील है कि इससे न सिर्फ आजीविका पर संकट पैदा होगा बल्कि धार्मिक स्थल की पवित्रता पर भी असर पड़ेगा। उनका कहना है कि तीर्थयात्रा में गोंडोला में आराम से यात्रा करने के बजाय पैदल चलना भी शामिल होना चाहिए। 2024 में प्रस्तावित रोपवे परियोजना को वैष्णो देवी संघर्ष समिति और दूसरे संगठनों के लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

उच्च स्तरीय समिति ने मुलाकात के बाद सभी प्रतिनिधिमंडलों को आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा। प्रशासन लंबे वक्त से लंबित और विवादित रोपवे मुद्दे को जल्द हल करना चाहती है। ऐसे में आने वाले दिनों में एक और दौर की चर्चा होने की उम्मीद है।