पूरे देश में सावन माह की शिवरात्रि की आज धूम मची हुई है। ऐसे में गाजियाबाद का सबसे प्राचीन मंदिर दूधेश्वर नाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ सुबह से दिखाई देने लगी हैं। भक्त अपनी पारी का इंतजार कर रहे है पुलिस प्रशासन के साथ-साथ मंदिर प्रशासन भी पूरी तरह से व्यस्था में लगा हुआ है।
भगवान श्रीराम द्वारा शिवलिंग का दूध से अभिषेक करने पर यहां शिव बाबा दुधेश्वर नाथ के रूप में कालांतर में प्रसिद्ध हुए। मंदिर के निर्माण को लेकर मान्यता है कि औरंगाबाद के देव और उमगा के बाद देवकुंड धाम एक ही रात में भगवान विश्वकर्मा द्वारा मंदिर का निर्माण किया था।
गाजियाबाद में श्री दूधेश्वर नाथ मंदिर एक प्राचीन शिव मंदिर है जो दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में शिव भक्तों के बीच लोकप्रिय है। मंदिर में शिव लिंगम रूप में विराजमान हैं और कहा जाता है कि यह कम से कम 5000 साल पुराना है। माना जाता है कि रावण के पिता बिस्वश्रवा कठोर ने यहां तपस्या की थी।
दूधेश्वर नाथ मंदिर का इतिहास रावण काल से बताया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिंडन नदी के किनारे पुलस्त्य के पुत्र और रावण के पिता ऋषि विश्रवा ने घोर तपस्या की थी।
बताया जाता है कि अपने पिता के बाद रावण ने भी इस मंदिर पर तपस्या की थी। इसी स्थान को दुधेश्वर हिरण्यगर्भ महादेव मंदिर मठ के रूप में जानते हैं। माना जाता है कि यहां पर भगवान शिव खुद प्रकट हुए थे। आज यहां पर जमीन से तीन फीट नीचे शिवलिंग मौजूद है।
इस मंदिर पर सावन के हर सोमवार को भक्तों को लंबी-लंबी लाइनें लगती हैं। वहीं, कुछ भक्त तो देर रात को ही लाइन में सबसे पहले पूजा करने के लिए खड़े हो जाते हैं।