होली से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहते है, इस दौरान यदि श्रद्धा और नियम के साथ पूजा-पाठ किया जाए, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है। इन दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या किसी नए कार्य की शुरुआत जैसे मांगलिक काम से परहेज किया जाता है।
आज से होलाष्टक शुरू हो गए हैं, होलाष्टक हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होता है और पूर्णिमा (होली) तक चलता है। इस दौरान यदि श्रद्धा और नियम के साथ पूजा-पाठ किया जाए, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं। इस अवधि का संबंध हिरण्यकशिपु और प्रह्लाद की कथा से माना जाता है, जिसमें अंत में भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर प्रह्लाद की रक्षा की थी।
होलाष्टक की कथा-
होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और उसके पिता हिरण्यकशिपु से जुड़ी कथा से है। हिरण्यकशिपु एक अत्याचारी राजा था, जो चाहता था कि सब उसकी पूजा करें। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद केवल भगवान विष्णु की भक्ति करता था। इससे क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को कई बार मारने की कोशिश की, पर हर बार भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की। अंत में हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका की मदद ली। होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान था। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई।
लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई, इसी घटना की याद में होली से पहले होलिका दहन किया जाता है। होलाष्टक के ये 8 दिन उसी संघर्ष और परीक्षा के प्रतीक माने जाते हैं, इन 8 दिनों को शुभ कार्यों (जैसे शादी, गृह प्रवेश, मुंडन आदि) के लिए सामान्यतः अशुभ माना जाता है।
ऐसे में आइए जानते हैं कि इन दिनों किन नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है-
1. भगवान की आराधना और मंत्र जाप
होलाष्टक के दौरान प्रतिदिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण या अपने इष्ट देव का पूजन करना लाभकारी माना गया है। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का नियमित जाप मन को स्थिर करता है और नकारात्मक विचारों को दूर करने में मदद करता है। इससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
2. दान-पुण्य का महत्व
इन आठ दिनों में दान करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, गुड़, गेहूं या आर्थिक सहायता देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि दान से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और ईश्वर की कृपा बनी रहती है।
3. सफाई और सकारात्मक वातावरण
होलाष्टक के समय घर की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साफ-सुथरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। शाम के समय दीपक जलाना और भजन-कीर्तन करना घर के माहौल को शांत और पवित्र बनाता है।
4. हनुमान जी की भक्ति
इन दिनों में हनुमान जी की उपासना भी शुभ मानी जाती है। विशेषकर मंगलवार या शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, तनाव और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं। इससे साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
यह जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है।