Chhattisgarh: बस्तर पंडुम यानी एक ऐसा उत्सव, जहां लोक परंपराएं केवल जीवित नहीं हैं, बल्कि समय के साथ इनकी जड़ें और भी गहरी होती जा रही हैं। साल 2025 में सांस्कृतिक पहचान की मजबूत नींव रखने के बाद बारी थी साल 2026 की। बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन इसलिए भी खास रहा क्योंकि इस बार राष्ट्रीय स्तर पर इसका भव्य आयोजन किया गया। संभाग स्तरीय प्रतियोगिता का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया जबकि समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद रहे।
बस्तर पंडुम का पहली बार संगठित और प्रभावशाली स्वरुप 2025 में सामने आया था। यही वजह थी कि इस बार इसका स्वरुप और भी व्यापक रहा। पंचायत स्तर से शुरू होकर यह संभाग स्तर तक पहुंचा। यह आयोजन अब केवल उत्सव नहीं बल्कि जनभागीदारी का सांस्कृतिक आंदोलन बन गया।
बस्तर की लोक संस्कृति अब राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान पा रही है। जहां 2025 ने बस्तर पंडुम को पहचान दी, वहीं 2026 के सफल और भव्य आयोजन ने उसे देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर स्थापित कर दिया। बस्तर पंडुम ने साबित कर दिया कि परंपरा को जब उचित मंच मिलता है, तब वह गांव से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बन जाती है।