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भारत-इंग्लैंड मुक्त व्यापार समझौता, जानिए दोनों देशों पर क्या होगा असर?

भारत और इंग्लैंड ने गुरुवार को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर दस्तखत किए। समझौते के तहत अगले साल से 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंचेंगे, जबकि भारत में कारों और व्हिस्की जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर शुल्क कम हो जाएंगे। ये भारत का 16वां मुक्त व्यापार समझौता और ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन का सबसे बड़ा समझौता है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और इंग्लैंड में उनके समकक्ष जोनाथन रेनॉल्ड्स ने लंदन में समझौते पर दस्तखत किए।

इस समझौते को व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता या सेटा कहा गया है। इसके तहत स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क फौरन 150 फीसदी से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इसे 2035 तक घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया जाएगा। भारतीय ऑटोमोबाइल पर पांच साल में आयात शुल्क घटाकर 10 फीसदी होगा, जो अभी 110 प्रतिशत तक है। बदले में, भारतीय निर्माताओं को इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए यूके के बाजार में कोटा ढांचे के अनुसार पहुंच मिलेगी।

मुक्त व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन में भारत के कई कृषि उत्पाद, जैसे फल, सब्जियां, अनाज, हल्दी, काली मिर्च, इलायची, और प्रसंस्कृत उत्पाद जैसे रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ, आम का गूदा, अचार और दालें शुल्क-मुक्त होंगी। समझौता लागू होने के बाद झींगा, टूना, मछली का चारा जैसे समुद्री उत्पाद पूरी तरह शुल्क-मुक्त हो जाएंगे। मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत से कपड़ा आयात पर भी शुल्क खत्म हो जाएगा। इससे ब्रिटेन के बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। जिन उत्पादों में बढ़ोतरी की संभावना है, उनमें सिले-सिलाए कपड़े, घरेलू कपड़े, कालीन और हस्तशिल्प शामिल हैं।

ये समझौता सेवाओं, नवाचार और अगली पीढ़ी के क्षेत्रों में नए मौकों भी पैदा करेगा। इसके अलावा भारतीय पेशेवरों को ब्रिटेन में तीन साल तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट मिलेगी। इस कदम से 75 हजार से ज्यादा मजदूरों और 900 कंपनियों को फायदे की उम्मीद है। इनमें खास कर आईटी और तकनीकी सेवाओं की कंपनियां हैं।