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टैरिफ वार में चीन का बड़ा पलटवार, अमेरिका पर लगाया 34 फीसदी जवाबी टैरिफ

वैश्विक व्यापार में शुरु हुए अमेरिका के टैरिफ वार में चीन ने भी बड़ा पलटवार किया है। चीन ने 10 अप्रैल, 2025 से सभी अमेरिकी इंपोर्ट्स पर अतिरिक्त 34 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इससे पहले अमेरिका ने भी चीनी वस्तुओं पर भारी भरकम टैरिफ लगाया था, जिसकी प्रतिक्रिया में चीन ने ये कदम उठाकर विश्व में तहलका मचा दिया है। चीन के इस पलटवार ने वैश्विक व्यापार में टैरिफ वार की संभावनाओं को और बढ़ाकर चिंता पैदा कर दी है और अब माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव अब और भी ज्यादा बढ़ सकता है।

चीन ने अमेरिका के सभी सामानों पर 34 फीसदी शुल्क लगाने के अलावा मिडियम और भारी खनिज निर्यात पर भी कंट्रोल लगाने की बात कही है, जो कि कंप्यूटर चिप्स, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, एयरोस्पेस और डिफेंस इंडस्ट्री के हाईटेक उत्पाद बनाने में इस्तेमाल होते हैं।

इसके अलावा, चीन ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण चुनिंदा अमेरिकी पोल्ट्री सप्लायर्स से इंपोर्ट को रोक दिया है और ताइवान को हथियारों की बिक्री करने से जुड़े उल्लंघनों का हवाला देते हुए 27 अमेरिकी कंपनियों को अपनी व्यापार प्रतिबंध सूची में शामिल किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कदम रणनीतिक रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेंगे और बढ़ते व्यापार तनाव में और बढ़ोतरी करेंगे। 

अमेरिका और चीन एक दूसरे पर जवाबी टैरिफ लगाकर वार-पलटवार कर रहे हैं, ऐसे में भारत इन दोनों देशों के टैरिफ वार में खुद के लिए लाभ की संभावनाएं तलाश रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि मौजूदा तनाव अलग अलग क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।

एक्सपर्ट्स ये भी सुझाव दे रहे हैं कि इस तनाव के बीच भारत अपनी रणनीति से ग्लोबल सप्लाई चेन का लाभ उठा सकता है क्योंकि जो कंपनियां चीन से दूर जाने की कोशिश कर रही हैं, वो भारत में आ सकती हैं बशर्ते कि वो वैश्विक मंच पर लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में प्रतिस्पर्धी बना रहे।

बीजिंग और वाशिंगटन दोनों ही अपने-अपने फैसलों पर अड़े हुए हैं, ऐसे में सवाल ये है कि पहले कौन झुकेगा? हालांकि दोनों पक्षों के अधिकारियों ने बातचीत में शामिल होने की इच्छा जताई है, लेकिन तनाव कम करने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप अभी तक सामने नहीं आया है।

फिलहाल, वैश्विक बाजार और व्यवसाय परेशान हैं, क्योंकि वे इस टैरिफ वार से शुरू हुए आर्थिक गतिरोध पर करीब से नज़र रख रहे हैं, जो फिलहाल कहीं से भी थमता नहीं दिख रहा है।