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क्वांटम तकनीक से हल होगी ट्रैफिक की समस्या? यूपीएसआईएफएस में छात्रों ने पेश किए नए आइडिया

उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में क्वांटम टेक्नोलॉजी पर स्टेज प्रेजेंटेशन आयोजित किया गया। बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में लॉ, बीटेक और एमटेक के छात्र-छात्राओं ने क्वांटम कंप्यूटिंग के जरिए ट्रैफिक समस्या के समाधान से जुड़े अपने आइडिया विशेषज्ञों के सामने रखे।

छात्रों ने ‘डिस्कवरी एवं क्वांटम कंप्यूटिंग के माध्यम से यातायात समस्या का समाधान’ विषय पर प्रेजेंटेशन दिया। इस दौरान विषय विशेषज्ञ डॉ. पवन शर्मा और हेराल्ड डी कोस्टा ने छात्रों के आइडिया को समझा और उन्हें नई तकनीक की बारीकियों से अवगत कराया।

कम होगा ईंधन और CO2 उत्सर्जन

प्रेजेंटेशन में छात्रों ने बताया कि क्वांटम तकनीक के इस्तेमाल से वाहनों का आइडल टाइम कम किया जा सकता है। इससे ईंधन की खपत और CO2 उत्सर्जन को घटाने में मदद मिल सकती है। छात्रों ने इसे ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में उपयोगी बताया।

उन्होंने सुरक्षित डेटा के लिए TLS 1.3 एन्क्रिप्शन और GDPR नियमों के तहत डेटा सुरक्षा का मॉडल भी प्रस्तुत किया। छात्रों के मुताबिक क्वांटम कंप्यूटिंग की मदद से कुछ परिस्थितियों में कम समय में बेहतर रूट तय करने की तकनीक विकसित की जा सकती है।

एंबुलेंस और पुलिस के लिए प्राथमिकता वाले रूट

छात्रों ने फॉरेंसिक और इमरजेंसी लॉजिस्टिक्स से जुड़े संभावित इस्तेमाल पर भी प्रस्तुति दी। इसके तहत भविष्य में एंबुलेंस, पुलिस और फॉरेंसिक सेवाओं के लिए ट्रैफिक की स्थिति के आधार पर प्राथमिकता वाले रूट तैयार करने की संभावना बताई गई। इस तरह की तकनीक से आपातकालीन सेवाओं को जाम वाले क्षेत्रों से बचाकर तेजी से गंतव्य तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

विषय विशेषज्ञ और अमेरिका के आईटी एक्सपर्ट डॉ. पवन शर्मा ने छात्रों की तकनीकी समझ की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान में छात्रों को जिस तरह का तकनीकी माहौल मिल रहा है, वह सराहनीय है। छात्रों ने टेक्नोलॉजी के विषय पर अपनी अच्छी पकड़ का प्रदर्शन किया है।

क्वांटम कंप्यूटिंग में अग्रणी बनने का लक्ष्य

संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे कार्यक्रमों से छात्रों को दुनिया में हो रहे तकनीकी प्रयोगों और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल को समझने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने से फॉरेंसिक साइंस और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। क्वांटम चिप्स और नई तकनीकों के विकास से फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव संभव हैं।

डॉ. गोस्वामी ने कहा कि संस्थान क्वांटम कंप्यूटिंग की दिशा में अग्रणी होकर काम कर रहा है और ट्रैफिक कंजेशन जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम में अपर निदेशक संजीव सुमन, उप निदेशक चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. निमिशा, डॉ. सेंथिल शिवासुब्रमण्यम और जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।