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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे का क्या होगा

ऐतिहासिक शब्द पर इन दिनों चहुंओर जोर है. सामान्य फैसला भी इस धड़ल्ले से ऐतिहासिक बता दिया जाता है कि ऐतिहासिक फैसले को ऐतिहासिक कहते हुए इक पल को सोचना पड़ जाता है कि ऐतिहासिक को ऐतिहासिक ही कहा जाए या कुछ और. खैर, ये सब प्रवचन हैं. मूल बात पर आते हैं. आज से सचमुच में एक ऐतिहासिक सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो रही है. ऐतिहासिक कई मायनों में.

पहला, सात जजों की एक संविधान पीठ इस साल के दूसरे हफ्ते में ही एक सुनवाई करने को बैठ रही है. आमतौर पर इतनी बड़ी बेंच बैठने का रिवाज अब नहीं नजर आता. आखिरी दफा अगर हम याद करें तो एक पिछले साल एक इतनी बड़ी बेंच बैठी थी जो साल 2017 के बाद पहली दफा हकीकत बनी थी. दूसरी बात ये कि यह मामला किसी एक विश्वविद्यालय का नहीं बल्कि यह देश के हजारों अल्पसंख्यक विश्वविद्यालयों का भविष्य तय करेगा. कैसे? बताएंगे आपको आगे. पहले थोड़ा पीछे चलते हैं.