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क्या है सीओपीडी? धूम्रपान और वायु प्रदूषण इसको बढ़ाने में कैसे देते हैं योगदान?

New Delhi: विश्व क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज दिवस, हर साल नवंबर महीने के तीसरे बुधवार को मनाया जाता है। दुनिया भर में मनाए जा रहे इस दिवस का मकसद सीओपीडी बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। ये एक फेफड़ों की बीमारी है जो सांस लेने में दिक्कत पैदा करती है। विश्व सीओपीडी दिवस मनाने का मकसद इस बीमारी की जल्द पहचान को बढ़ावा देना, स्वस्थ जीवनशैली विकल्पों को प्रोत्साहित करना और सीओपीडी से जूझ रहे लोगों के लिए वायु प्रदूषण से पैदा हुए खतरों का समाधान करना भी है।

इस साल के विश्व सीओपीडी दिवस की थीम है 'अपने फेफड़ों के काम को जानें'। ये फेफड़ों की सेहत को बनाए रखने में स्पाइरोमेट्री की अहमियत पर जोर देता है। स्पाइरोमेट्री एक पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट है। इसके जरिए फेफड़ों के काम करने की क्षमता को जांचा जाता है। स्पाइरोमेट्री के जरिए ये मापा जाता है कि एक व्यक्ति सांस लेने और छोड़ने के दौरान एक बार में कितनी हवा बाहर निकाल सकता है।

सीओपीडी की शुरुआती वजहों में धूम्रपान और वायु प्रदूषण के लंबे वक्त तक संपर्क में रहना शामिल है। हालांकि जेनेटिक्स भी अहम रोल निभाता है। खराब एयर क्वालिटी के संपर्क में आने से सीओपीडी से पीड़ित लोगों के लिए अस्पताल में भर्ती होने और मौत का खतरा बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 2021 में दुनिया भर में सीओपीडी की वजह से 31 लाख लोगों की मौत हुई।

सीओपीडी के लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, पुरानी खांसी और थकान शामिल हैं। ये धीरे-धीरे विकसित होते हैं। बीमारी की शुरुआत में ही पहचान इसके जल्द इलाज के लिए काफी अहम है। सीओपीडी की रोकथाम में धूम्रपान से बचना, बाहर जाते वक्त मास्क पहनना और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए शारीरिक तौर से एक्टिव रहना शामिल है।

डॉक्टर सीओपीडी को बढ़ने से रोकने के लिए पर्यावरण प्रदूषण को कम करने को लेकर नीति-स्तरीय उपायों की जरुरत पर जोर देते हैं।