आज हम आपको एक ऐसे इतिहास के बारे में बताएंगें जहां एक महान राजा ने भारत को शौर्य और वैभव की नई उंचाइयों पर पहुंचाया था। हम बात कर रहे है महान सम्राट राजा राज चोल की, जिन्होंने चोल सम्राज्य के लोगों को प्रेरित किया और दक्षिण भारत को पूर विश्व में प्रसिद्ध किया। राजा राज चोल के शासन काल को ऐतिहासिक नजरिए से सोने का युग माना जाता है। राजा चोल ने न केवल पूरे दक्षिण भारत में अपनी शक्ति का प्रभाव दिखाया बल्कि पूरे एशिया में अपनी शक्ति और योग्यता को प्रदर्शन कर लोगों को चोल सम्राज्य का प्रभाव दिखाया। राजा चोल का शासन काल 10वीं और 11वीं सदी के बीच था। उनके शासन काल में उन्होंने पूरे चोल सम्राज्य का मार्ग दर्शन किया। आइए राजा राज चोल के बारे में कुछ बातें जानते हैं।
राजा राज चोल का जन्म लगभग 947 ईस्वी में हुआ था। वह चोल सम्राज्य के महान और निडर राजा थे। राजा राज चोल अपने समय के सबसे प्रभावशाली राजा थे। इन्होंने कई युद्ध लड़े और जीते भी जिसके वजह से इनका नाम इतिहास में हमेशा अमर रहेगा। राजा चोल ने अपने सम्राज्य को पूर्व से दक्षिण एशिया तक फैलाया था। उनकी सेना ने समुद्र पर भी विजय प्राप्त की थी। वास्तुकला और कला का विकास उनके शासनकाल का एक प्रमुख योगदान था। राजा राज चोल ने "बृहतेश्वर मंदिर" बनवाया था, जो आज भी तमिलनाडु के तंजावुर में है। यह मंदिर चोल कला का अच्छा उदाहरण है।
राजा राज चोल का योगदान भारतीय संस्कृति और इतिहास में बेहद महत्तवपूर्ण तरीके से याद किया जाता है। राजा चोल का जीवन हमें ये बताता है की एक अच्छा नेता कैसे बने और अच्छा नेता केवल युद्ध नहीं बल्कि सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना सकता है।