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योगी सरकार बनाएगी इनलैंड वाटर अथॉरिटी, यूपी की 11 नदियों में नावों का पंजीकरण होगा अनिवार्य

उत्तर प्रदेश की नदियों में नावों से सफर अब अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की तैयारी है। योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत नावों के पंजीकरण, संचालन और सुरक्षा के लिए नए नियम बनाए जाएंगे। जल परिवहन की निगरानी के लिए ‘इनलैंड वाटर अथॉरिटी’ का गठन भी किया जाएगा।

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार, इस नई व्यवस्था से नदी पर्यटन, माल परिवहन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

11 प्रमुख नदियों में नावों का पंजीकरण अनिवार्य

नई नियमावली के तहत गंगा, यमुना, सरयू और घाघरा समेत प्रदेश की 11 प्रमुख नदियों में चलने वाली यांत्रिक और गैर-यांत्रिक नावों तथा स्टीमर का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।

नावों की यात्री क्षमता के आधार पर पंजीकरण शुल्क तय किया जाएगा। गैर-यांत्रिक नावों के लिए 50 रुपये पंजीकरण शुल्क प्रस्तावित है। इससे नावों और उनके संचालकों का रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।

यात्रियों और नाविकों के बीमा पर जोर

जल परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए यात्रियों और नाविकों के बीमा की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। छोटे नाव संचालकों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले नाविकों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे नावों के संचालन की जानकारी व्यवस्थित रखने, सुरक्षा मानकों का पालन कराने और दुर्घटनाओं की स्थिति में जवाबदेही तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

16 अध्यायों में तय होंगे संचालन के नियम

नई नियमावली उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियम, 2002 की जगह लेगी। इसे अंतर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021 के अनुरूप तैयार किया गया है।इसमें कुल 16 अध्याय हैं। पहले 14 अध्याय यांत्रिक जलयानों, 15वां अध्याय गैर-यांत्रिक नावों और 16वां अध्याय दोनों तरह के जलयानों के संचालन और नियमन से जुड़े प्रावधानों पर केंद्रित है।

नए सुरक्षा मानक अपनाने के लिए मिलेंगे 90 दिन

नियमावली को अधिसूचित करने से पहले संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत इसका प्रकाशन किया जाएगा। नियम लागू होने की तारीख से पहले से संचालित जलयानों को नए मानकों के अनुरूप ढालने के लिए 90 दिन का समय दिया जाएगा।

योगी सरकार का लक्ष्य जल परिवहन में सुरक्षा और जवाबदेही बढ़ाने के साथ प्रदेश की नदियों को पर्यटन और माल ढुलाई के बेहतर माध्यम के रूप में विकसित करना है।