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योगी सरकार में खेती से समृद्धि की राह, आधुनिक तकनीक और नए प्रयोगों से बढ़ेगी किसानों की आय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों के बीच ‘उत्तर प्रदेश 2.0: कृषि से समृद्धि’ यूपी संवाद आयोजित किया गया। इसमें कृषि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों ने खेती को लाभकारी बनाने के तरीकों पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, बाजार तक सीधी पहुंच और खेती के साथ दूसरे व्यवसाय अपनाकर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है।

कार्यक्रम में खेती की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने, कृषि उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने और सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। अलग-अलग सत्रों में खेती के व्यावहारिक अनुभवों के साथ नई तकनीकों और आय के वैकल्पिक साधनों पर भी विचार साझा किए गए।

प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने ‘किसान भाई-बंपर कमाई’ सत्र में अपने खेती के दिनों के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके खेत में एक-एक किलो तक के आलू पैदा हुए थे। उन्होंने लहसुन की फसल के साथ मेड़ों पर शलगम उगाने और पांच-पांच किलो तक के शलगम पैदा होने का भी जिक्र किया।

राजभर ने मटर की पैदावार का अनुभव बताते हुए कहा कि मंडी में उनकी उपज देखकर कारोबारियों को पहले विश्वास नहीं हुआ, लेकिन खेत देखने के बाद वे हैरान रह गए। उन्होंने मनहर धान का भी उल्लेख किया, जिसे उनके अनुसार करीब 60 दिनों में तैयार किया जा सकता है। इस सत्र में खेती के अनुभवों के जरिए बेहतर उत्पादन और किसानों की कमाई बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने ‘पशु नहीं, प्रॉफिट पालन’ सत्र में निषाद समाज की सामाजिक और आर्थिक प्रगति पर अपने विचार रखे। उन्होंने शिक्षा, सरकारी सुविधाओं और रोजगार के अवसरों को समाज की तरक्की के लिए महत्वपूर्ण बताया।

सत्र में मत्स्य पालन से जुड़े परिवारों की आजीविका मजबूत करने और मछली पालन को आय के बेहतर साधन के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने और लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया।

‘सरकार और बाजार मेरे द्वार’ सत्र में कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने किसानों को बाजार से जोड़ने और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने खेती में उत्पादन बढ़ाने के साथ उपज की बिक्री के लिए बेहतर व्यवस्था को भी जरूरी बताया। चर्चा में कहा गया कि किसानों को सरकारी योजनाओं की सही जानकारी, कृषि उत्पादों की खरीद की व्यवस्था और बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

‘खेती हाईटेक, लाइफ सेट’ सत्र में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता, आईआईटी कानपुर के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. जयंत कुमार सिंह और पद्मश्री सम्मानित प्रगतिशील किसान राम शरण वर्मा ने आधुनिक कृषि तकनीकों की संभावनाओं पर चर्चा की।

इस दौरान सेंसर आधारित तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से मिट्टी की स्थिति समझने और फसलों के लिए जरूरी पोषक तत्वों का आकलन करने पर जोर दिया गया। चर्चा में बताया गया कि सेंसर आधारित तकनीक से मिट्टी की जांच लगभग एक मिनट में की जा सकती है। इससे फसल की जरूरत के अनुसार खाद और दूसरे कृषि संसाधनों का इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है। तकनीक के बेहतर उपयोग से खेती की लागत घटाने और संसाधनों की बचत करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।

‘लाभार्थी लाइव’ सत्र में विधायक महेश त्रिवेदी और कल्याणपुर की विधायक नीलिमा कटियार ने किसानों और अन्य लाभार्थियों से बातचीत की। इस दौरान किसान सम्मान निधि, किसान दुर्घटना बीमा योजना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के लाभ पर चर्चा हुई। नीलिमा कटियार ने महिला स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। महिला किसान नीतू देवी ने मछली पालन, कृषि मशीनों और दूसरी सुविधाओं से आजीविका के नए अवसर मिलने की जानकारी दी। वहीं, किसान सुनील कुमार ने बीज, खाद और कृषि उपकरणों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और प्राकृतिक खेती के बारे में बताया। किसानों के समूहों के माध्यम से तकनीकी जानकारी साझा करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।

सेब, फूलों और जैविक खेती से किसान तलाश रहे नए अवसर

‘यूपी का स्मार्ट अन्नदाता’ सत्र में किसानों ने खेती में नए प्रयोगों के अनुभव साझा किए। इसमें कानपुर में कश्मीर के सेब उगाने वाले किसान मंजीत, उन्नाव में नीदरलैंड के फूल उगाने वाले किसान शांतनु शुक्ला और बेंगलुरु में आईटी की नौकरी छोड़कर कानपुर में जैविक खेती करने वाले किसान दंपती रश्मि और अंकुर सचान शामिल हुए। विधान परिषद सदस्य सलिल बिश्नोई भी चर्चा का हिस्सा रहे।

इन अनुभवों से पता चला कि पारंपरिक फसलों के अलावा सेब, फूलों और जैविक उत्पादों की खेती भी किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खोल सकती है। हालांकि, ऐसे प्रयोगों में स्थानीय जलवायु के अनुकूल फसलों और किस्मों का चयन, उत्पादन की गुणवत्ता और बाजार में बिक्री की उचित व्यवस्था जरूरी है।

यूपी संवाद में हुई चर्चा का मुख्य संदेश रहा कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं, बाजार से जुड़ाव और किसानों के नए प्रयोगों को साथ लेकर चलना जरूरी है। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ आय बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं।