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शिव जी बापू जी महाराज का बड़ा बयान, शंकराचार्य सिर्फ अंबानी-अडानी के घर क्यों जाते हैं? गरीबों के घर कब जाएंगे?

जयपुर में आयोजित ‘संत संसद 2026’ में आस्था के साथ देशप्रेम का विशेष संगम देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क 10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया। शुरुआत में संतों ने अमर जवान ज्योति पर पहुंचकर शहीदों को नमन किया। वहीं, महिलाओं ने कलश यात्रा के जरिए संतों का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे और उन्होंने नेटवर्क 10 की इस पहल की सराहना की। 

इस विशेष कार्यक्रम में गुजरात के वलसाड से शिव जी बापू जी महाराज भी शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में समाज और संत परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि जब तक देश के चारों शंकराचार्य झोपड़ियों तक नहीं पहुंचेंगे, आम हिंदू परिवारों के बीच नहीं जाएंगे, और वैभव व सुविधाओं का त्याग कर समाज के व्यक्तियों से नहीं जुड़ेंगे, तब तक हिंदू समाज का वास्तविक एकीकरण संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल बड़े उद्योगपतियों या संपन्न वर्ग तक सीमित रहकर समाज में व्यापक परिवर्तन नहीं लाया जा सकता।

महाराज जी ने इस बात पर भी जोर दिया कि सच्चाई कड़वी हो सकती है, लेकिन उसे स्वीकार करना आवश्यक है। उन्होंने आयोजनकर्ता संजय गिरी की सहनशीलता और इस तरह के मंच के आयोजन के लिए उनकी सराहना की। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक काव्यात्मक अंदाज में प्रकृति और ईश्वर की रचना की सुंदरता का वर्णन करते हुए कहा कि ईश्वर ने संसार को अत्यंत सुंदर बनाया है, लेकिन मनुष्य अपने कर्मों से उसे विकृत करता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक महापुरुष समाज के बीच जाकर उससे जुड़ेंगे नहीं, तब तक वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं है।

आदि शंकराचार्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने मात्र 32 वर्ष की आयु में सनातन धर्म की स्थापना और पुनर्जागरण का कार्य किया, जबकि आज के समय में लोग लंबे समय तक पदों पर बने रहकर भी समाज में अपेक्षित परिवर्तन नहीं ला पा रहे हैं। महाराज जी ने यह भी कहा कि समाज को जागृत करने के लिए स्वयं मजबूत होना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो परिस्थितियों को बदला जा सकता है।

दिल्ली में आयोजित एक धर्म संसद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी धार्मिक संस्थाओं के संसाधनों और सरकारी हस्तक्षेप पर चर्चा हुई थी। इस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि आस्था सशक्त हो, तो निर्भरता की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने लोगों से भगवान पर विश्वास रखने और आत्मबल को मजबूत करने का संदेश दिया। अंत में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि संत समाज और आम जन एक-दूसरे से जुड़कर, आस्था, विश्वास और एकता के साथ आगे बढ़ें। यही मार्ग समाज के उत्थान और राष्ट्र की मजबूती की दिशा में सार्थक कदम साबित होगा।