चंडीगढ़ के कई प्रमुख स्कूलों को गुरुवार सुबह बम धमकी वाले ईमेल मिलने के बाद पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया। प्रशासन ने तुरंत सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर एहतियाती कदम उठाए और मामले की जांच शुरू कर दी। चंडीगढ़ पुलिस के मुताबिक, ये ईमेल पहले मिली धमकियों की तरह ही पैटर्न में भेजे गए हैं। फिलहाल किसी भी स्कूल या परिसर से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और साथ ही लोगों में दहशत न फैलने देने की अपील भी कर रही है।
इससे पहले अप्रैल में भी चंडीगढ़ में इसी तरह का मामला सामने आया था, जब मेयर कार्यालय, सचिवालय, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, गांधी भवन और कई स्कूलों में बम विस्फोट की धमकी वाला ईमेल भेजा गया था। उस ईमेल में कथित विस्फोटों के समय भी बताए गए थे। उसमें दावा किया गया था कि स्कूलों को दोपहर 1:11 बजे, मेयर कार्यालय को 2:11 बजे और सचिवालय को 3:11 बजे निशाना बनाया जाएगा। साथ ही रात 9:11 बजे चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के गांधी भवन में ग्रेनेड हमले की धमकी दी गई थी।
ईमेल में लिखा था, “खालिस्तान वाले बच्चों के खिलाफ नहीं, बल्कि ‘हिंदू-स्तान’ मोदी सरकार को तबाह करेंगे — खालिस्तान।” संदेश में लोगों को “अपने बच्चों को बचाने” की चेतावनी भी दी गई थी और शहर में बड़े खतरे की बात कही गई थी। यह घटना 1 अप्रैल को दिल्ली के मेयर राजा इकबाल सिंह के कार्यालय को मिली धमकी के बाद सामने आई थी। वह ईमेल मेयर की आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेजा गया था, जिसके बाद दिल्ली में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने बताया कि देशभर में सरकारी दफ्तरों, हाई कोर्ट और अन्य संस्थानों को 1,000 से अधिक फर्जी धमकी संदेश भेजने के आरोप में गिरफ्तार 47 वर्षीय श्रीनिवास लुईस को छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी का कर्नाटक के मैसूरु में जमीन विवाद चल रहा था और इसी वजह से वह अदालतों से नाराज था। उसने कानून की पढ़ाई करने की इच्छा जताई थी और न्याय न मिलने से परेशान होकर इस तरह के ईमेल भेजे।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि श्रीनिवास लुईस NET परीक्षा पास कर चुका है और असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर भी काम कर चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ज्यादातर ईमेल और संदेश अपने फोन से भेजता था और IP एड्रेस छिपाने में माहिर था। उसने पाकिस्तान के कुछ शहरों तक भी ईमेल भेजे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपना पता बदलता रहता था। पुलिस ने कहा कि उसके निशाने पर सिर्फ विभिन्न शहरों की अदालतें ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट भी था।