भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे कमजोर होकर ₹85.80 पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसी बाहरी आर्थिक स्थितियों का असर रुपये पर साफ देखा गया। कारोबार की शुरुआत में रुपया मामूली मजबूती के साथ खुला था, लेकिन दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद अंततः यह कमजोर होकर बंद हुआ। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की ओर से हो रही डॉलर की मांग रुपये पर दबाव डाल रही है।
इसके अलावा, विदेशी बाजारों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने के संकेतों ने भी रुपये पर असर डाला। वहीं, घरेलू शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख और आयातकों की डॉलर मांग ने भी रुपये को नीचे की दिशा में धकेला।
हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से समय-समय पर किए गए हस्तक्षेपों ने रुपये की गिरावट को सीमित करने की कोशिश की। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों और तेल की कीमतों की दिशा के आधार पर रुपये में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। मौजूदा स्थिति में निवेशकों और आयातकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि डॉलर की मांग और वैश्विक बाजार की अस्थिरता आगे भी रुपये को प्रभावित कर सकती है।