पंजाब पुलिस ने मंगलवार को उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर आते-जाते समय वर्दी न पहनने की सलाह दी गई है। पुलिस ने कहा कि मुख्यालय या उसके अधीन किसी भी कार्यालय की ओर से ऐसी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है। पंजाब पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर जाते या लौटते समय वर्दी से बचने या सिविल कपड़े पहनने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे संदेशों को फर्जी बताया और लोगों से केवल आधिकारिक माध्यमों से मिली जानकारी पर भरोसा करने की अपील की।
इस बीच पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने इस मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल किए। बाजवा ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों को वर्दी में सफर न करने और थाने पहुंचने के बाद वर्दी पहनने की सलाह दी जा रही है। बाजवा ने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की खबरें पंजाब के लोगों की सुरक्षा और पुलिसकर्मियों के मनोबल को लेकर चिंता पैदा करती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी सवाल किया कि पंजाब की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी किसके पास है।
यह विवाद 18 सितंबर के एक कथित मेमो के सामने आने के बाद शुरू हुआ। इसमें पुलिसकर्मियों की व्यक्तिगत सुरक्षा और ड्यूटी प्वाइंट व चेकपोस्ट पर सुरक्षा मजबूत करने से जुड़े निर्देश होने की बात कही गई थी। कथित मेमो में चेकपोस्ट की सुरक्षा व्यवस्था, पुलिसकर्मियों के आने-जाने के रास्तों, संदिग्ध लोगों और गतिविधियों पर नजर रखने, रात में गश्त बढ़ाने और AGTF, ANTF तथा खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय जैसे मुद्दों का भी उल्लेख था। हालांकि, पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया कि उसके मुख्यालय या उसके अधीन किसी कार्यालय ने पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर आते-जाते समय वर्दी नहीं पहनने का कोई निर्देश जारी नहीं किया है।