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मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का वॉकआउट, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया। विपक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू द्वारा नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को बैठक में बुलाने का विरोध किया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्षी दलों ने इस फैसले के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया और बैठक से बाहर निकल गए।

महुआ मोइत्रा ने कहा कि NCPI एक मान्यता प्राप्त पार्टी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के 20 बागी सांसदों के विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूरी नहीं दी है और उनकी अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं भी लंबित हैं। ऐसे में उन्हें बैठक में बुलाने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने बताया कि इस विरोध में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झामुमो, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दल और शिवसेना (यूबीटी) समेत सभी प्रमुख विपक्षी दल शामिल हुए।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि पार्टी ने संविधान और संसदीय परंपराओं की रक्षा के लिए वॉकआउट किया। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने भी विरोध का समर्थन करते हुए कहा कि बागी सांसदों को किस कानूनी आधार पर मान्यता दी गई, यह स्पष्ट नहीं है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एन.डी. गुप्ता ने भी सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के मामले में भी याचिका लंबित होने के बावजूद अलग बैठने की व्यवस्था कर दी गई, जो लोकतंत्र के खिलाफ है। बता दें कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।