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LPG संकट पर संसद में विपक्ष का हंगामा, पश्चिम एशिया तनाव के बीच सरकार पर निशाना

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से पहले बुधवार को विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में एलपीजी आपूर्ति के मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले व्यापार पर असर पड़ा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद तनाव और बढ़ गया।

इसके जवाब में ईरान ने कई खाड़ी देशों में इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे जलमार्ग पर और व्यवधान पैदा हुआ और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर भी असर पड़ा। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, “सरकार ने एलपीजी संकट से ठीक तरीके से नहीं निपटा है। लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हम चाहते हैं कि इस संकट का जल्द समाधान हो।”

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा, “अगर प्रधानमंत्री मौजूद होंगे, तो हम अपने सुझाव रखेंगे। हमारे पास कई सुझाव हैं। सबसे पहले, वैश्विक संकट में भारत की क्या भूमिका है? यहां तक कि पाकिस्तान ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है और ट्रंप से मध्यस्थता की पेशकश की है, जिसे ट्रंप ने स्वीकार किया। ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को गुमराह कर रहे हैं... बेहतर होगा कि प्रधानमंत्री मोदी विपक्ष से भी बात करें।”

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “भाजपा यह कह रही है कि सब कुछ ठीक है, लेकिन गांवों और शहरों में जाकर देखिए—हर जगह एलपीजी की कमी है। नवरात्रि और ईद के दौरान यह कमी साफ दिखाई दी। विपक्ष के तौर पर हम संसद के गेट पर इस मुद्दे को लेकर विरोध करेंगे और जनता की आवाज उठाएंगे।”

एक दिन पहले, दो भारतीय एलपीजी कैरियर—‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’—ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया। इन जहाजों में कुल 92,612.59 मीट्रिक टन एलपीजी लदा हुआ है। ‘पाइन गैस’ के इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पार करने के दृश्य भी सामने आए। इन जहाजों पर क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक सवार हैं, जो इस क्षेत्र में संचालन कर रहे हैं। सफल पारगमन के बाद ये जहाज भारत के लिए रवाना हो चुके हैं, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति को मजबूती मिलेगी। इनके 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया। राज्यसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद को बढ़ावा देने की बात कही, क्योंकि यह संघर्ष व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है।

उन्होंने आने वाले समय को देश के लिए “बड़ी परीक्षा” बताते हुए राज्य सरकारों से सहयोग मांगा और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “आने वाला समय हमारे देश के लिए एक बड़ी परीक्षा होगा और इसमें राज्यों का सहयोग बेहद जरूरी है। संकट के समय गरीब, मजदूर और प्रवासी सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ समय पर मिले। जहां भी प्रवासी मजदूर कार्यरत हैं, उनकी कठिनाइयों को कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाए जाएं।”