डिजिटल अरेस्ट घोटालों से जुड़े साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ऑपरेशन चक्र-VI के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 राज्यों में 80 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस अभियान के लिए CBI ने 60 विशेष टीमों का गठन किया था। CBI के अनुसार, यह कार्रवाई डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 200 से अधिक मामलों की जांच के तहत की गई। एजेंसी ने चेन्नई और कोलकाता से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर शेल कंपनियां बनाने और म्यूल बैंक खातों के संचालन में शामिल होने का आरोप है। इन खातों के जरिए कथित तौर पर करीब 2 करोड़ रुपये की अवैध रकम को ठिकाने लगाया गया था।
जांच के दौरान CBI ने एक ऐसी फर्जी वेबसाइट का भी पर्दाफाश किया, जिसका URL सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से मिलता-जुलता था। आरोपियों ने इस नकली वेबसाइट का इस्तेमाल लोगों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने और ठगने के लिए किया। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की शिकायत के आधार पर CBI ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। उन्नत फोरेंसिक तकनीकों और तकनीकी विशेषज्ञता की मदद से एजेंसी ने भारत और विदेशों में सक्रिय इस आपराधिक नेटवर्क के अहम पहलुओं की पहचान की।
जांच में सामने आया कि आरोपी अदालतों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के आदेशों जैसे दिखने वाले फर्जी दस्तावेज और नकली आदेश तैयार कर पीड़ितों को भेजते थे, ताकि उनकी ठगी को विश्वसनीय बनाया जा सके। छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन और बैंक लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। इन सभी की फोरेंसिक जांच की जा रही है।
CBI को ऐसे सबूत भी मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि इस नेटवर्क ने सिर्फ भारतीय नागरिकों ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों के लोगों को भी अपना शिकार बनाया है। संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इसकी जानकारी दी जा रही है। CBI ने कहा है कि वह साइबर अपराध के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।