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Navratri 2026: नवरात्रि के दूसरे दिन होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, ऐसे पड़ा मां का नाम ब्रह्मचारिणी

आज यानी 20 मार्च, शुक्रवार को चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है. नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में जलपात्र होता है. मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करने से मनचाहा वरदान मिलता है. मां भक्तों के दुखों को हरने वाली और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं. 

कथा के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ था. बचपन से ही उनका मन भगवान शिव को पाने के लिए समर्पित था. एक दिन नारद जी ने उन्हें शिव जी को पति रूप में पाने का मार्ग बताया, जिसके बाद देवी ने कठोर तपस्या करने का निश्चय किया. मां ब्रह्मचारिणी ने हजारों वर्षों तक बहुत कठिन तप किया. शुरुआत में उन्होंने केवल फल और फूल खाकर जीवन बिताया. फिर उन्होंने सौ वर्षों तक सिर्फ जमीन पर रहकर सादा भोजन किया. इसके बाद उन्होंने गर्मी, सर्दी और बारिश की परवाह किए बिना तपस्या जारी रखी.

कहा जाता है कि कई हजार सालों तक उन्होंने केवल बिल्वपत्र खाए और भगवान शिव की भक्ति करती रहीं. बाद में उन्होंने पत्ते खाना भी छोड़ दिया और बिना भोजन और पानी के तप करने लगीं. इस कठिन तपस्या के कारण उनका शरीर बहुत कमजोर हो गया था. उनका तप देखकर सभी देवता, ऋषि-मुनि अत्यंत प्रभावित हुए और उन्होंने देवी को भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त करने का वरदान दिया. मां की इसी कठिन तपस्या के कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा था.