ओडिशा के पुरी में आयोजित भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सिंहद्वार के पास अत्यधिक भीड़ के कारण कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें आपातकालीन बचाव दल ने स्ट्रेचर के जरिए सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया। मौके पर तैनात सुरक्षा बलों और मेडिकल टीमों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।
रथ यात्रा के अवसर पर पुरी की बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) पर लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए। भक्तों ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन किए और उनकी भव्य यात्रा के साक्षी बने। रथ यात्रा के दौरान सबसे पहले भगवान सुदर्शन को मंदिर से बाहर लाया गया। इसके बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक 'पहंडी' अनुष्ठान के तहत मंदिर से निकालकर उनके रथों तक लाया गया।
रथों पर विराजमान होने से पहले तीनों देवताओं ने अपने-अपने रथों—नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन—की परिक्रमा की। पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने पारंपरिक 'छेरा पहंरा' रस्म निभाई। उन्होंने सोने की मूठ वाली झाड़ू से तीनों रथों की सफाई की और उन पर सुगंधित पवित्र जल का छिड़काव किया। यह परंपरा भगवान के सामने सभी के समान होने का संदेश देती है। सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने के बाद दोपहर करीब 2 बजे श्रद्धालुओं ने भगवान के रथ खींचने की परंपरा शुरू की। जय जगन्नाथ के जयघोष के बीच लाखों भक्तों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रथ यात्रा में भाग लिया।