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होर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी सफलता, उर्वरक लेकर 15 जहाज सुरक्षित भारत की ओर बढ़े

होर्मूज स्ट्रेट इन दिनों दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री लाइनों में गिने जा रहा हैं. ईरान-अमेरिका से जुड़े तनाव के कारण कई जहाज बीच रास्ते से लौट रहे हैं. तेल, गैस और जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर पूरी दुनिया चिंता में है. ऐसे माहौल में भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. सरकार का दावा है कि वैश्विक संकट के बावजूद देश में खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी.

रूस, अमेरिका, मोरक्को, ओमान, जॉर्डन, सऊदी अरब और मिस्र जैसे देशों से उर्वरक लेकर आने वाले 15 जहाज सुरक्षित भारत की ओर बढ़ रहे हैं. इससे खरीफ सीजन में किसानों को यूरिया और डीएपी की उपलब्धता को लेकर राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. यह केवल सप्लाई चेन बचाने की कहानी नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण हालात में भारत की रणनीतिक तैयारी का भी बड़ा उदाहरण माना जा रहा है.

दुनिया के कई जहाज जहां होर्मूज के पास पहुंचकर वापस लौटने को मजबूर हुए, वहीं भारत ने पहले से तैयार कूटनीतिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क के दम पर उर्वरक आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया. सरकार के अनुसार 28 भारतीय मिशनों ने अलग-अलग देशों के साथ समन्वय बनाकर खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की. साथ ही घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया गया है, जिससे आयात पर अतिरिक्त दबाव कम हुआ है. सरकार का कहना है कि राज्यों को उनकी मांग के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा और किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.

होर्मूज संकट के बीच भारत ने कैसे बचाई खाद की सप्लाई?

  • होर्मूज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है. हाल के दिनों में सुरक्षा कारणों से कई अंतरराष्ट्रीय जहाज इस रास्ते से लौट गए. लेकिन भारत ने पहले से वैकल्पिक योजना तैयार कर रखी थी. विदेश मंत्रालय, उर्वरक मंत्रालय और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों ने मिलकर विभिन्न देशों से उर्वरकों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की. इसी रणनीति के कारण भारत के लिए निर्धारित जहाज बिना किसी बड़े व्यवधान के अपनी यात्रा जारी रख सके.
  • सरकार के मुताबिक फिलहाल आठ जहाजों में 3.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 2.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी और तीन जहाजों में 1.11 लाख मीट्रिक टन सल्फर भारत लाया जा रहा है. इसके अलावा पांच अन्य जहाज भी भारत के लिए निर्धारित हैं. इनमें एक जहाज में लगभग 0.25 लाख मीट्रिक टन अमोनिया और दूसरे में 0.45 लाख मीट्रिक टन यूरिया लदा हुआ है. यह खेप खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की मांग पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
  • भारत ने केवल आयात पर भरोसा नहीं किया, बल्कि घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया है. सरकार के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून की पहली तिमाही में 71.55 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ, जबकि लक्ष्य 67.86 लाख मीट्रिक टन था. यानी लक्ष्य से 3.69 लाख मीट्रिक टन अधिक उत्पादन किया गया. इसी तरह डीएपी का उत्पादन भी तय लक्ष्य से 1.23 लाख मीट्रिक टन ज्यादा रहा. प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने से सभी यूरिया संयंत्र पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं.

किन देशों से आ रही है सबसे बड़ी खाद की खेप?

सरकार ने यूरिया की आपूर्ति के लिए ओमान, रूस, मिस्र और तुर्की जैसे देशों के साथ व्यवस्था बनाई है. वहीं डीएपी और एनपीके उर्वरकों के लिए रूस, मोरक्को, अमेरिका, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे प्रमुख सप्लायर देशों से लगातार खेप भारत भेजी जा रही है. इन देशों से आने वाली आपूर्ति ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी एक क्षेत्र में तनाव होने पर भी पूरे सिस्टम पर असर न पड़े.

किसानों को क्यों नहीं होगी खाद की कमी?

सरकार के अनुसार इस समय देश में कुल 163.35 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडार उपलब्ध है. यह सालाना जरूरत का 51 प्रतिशत से अधिक है. पर्याप्त स्टॉक, बढ़ा हुआ घरेलू उत्पादन और लगातार जारी आयात के कारण राज्यों को उनकी मांग के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराए जाएंगे. अधिकारियों का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को यूरिया या डीएपी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा, भले ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर तनाव बना रहे.