कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पहला तगड़ा झटका लगा है. सीएम बनने के बाद डीके शिवकुमार को अपने ही सीनियर साथी ने झटका दिया है. मनचाहा विभाग न मिलने से नाराज चल रहे रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद छोड़ दिया है. रामालिंगा रेड्डी ने मीडिया के सामने आकर डीके शिवकुमार की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है. इस तरह से कर्नाटक की डीके शिवकुमार सरकार में दरार पड़ गई है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार के शपथ लेने और नई कैबिनेट के गठन के कुछ ही दिन बाद सरकार के भीतर असंतोष दिखा है.
सीनियर कांग्रेस नेता और कर्नाटक के मंत्री रामलिंगा रेड्डी विभागों के बंटवारे को लेकर नाराज हैं. इसी कारण से उन्होंने इस्तीफा दिया है. रामलिंगा रेड्डी को बेंगलुरु विकास विभाग न मिलने और मेजर व मीडियम सिंचाई विभाग दिए जाने से वे नाराज हैं. रामलिंगा रेड्डी को 2023 से ही बेंगलुरु विकास विभाग देने का आश्वासन दिया गया था. हालांकि, कर्नाटक सरकार के सबसे प्रभावशाली विभागों में से एक माने जाने वाला यह विभाग अब मंत्री कृष्णा बैरे गौड़ा को सौंप दिया गया है.
कर्नाटक के मंत्री रामालिंगा रेड्डी ने अपने इस्तीफे पर कहा, ‘मैं अभी भी कांग्रेस पार्टी में हूं. मैंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है. मैं पिछले 53 सालों से कांग्रेस पार्टी में हूं. मैंने पार्टी में कई जिम्मेदारियां निभाई हैं. मैंने पूर्व मुख्यमंत्री एम. वीरप्पा मोइली और एस.एम. कृष्णा समेत कई मुख्यमंत्रियों की कैबिनेट में मंत्री के तौर पर काम किया है. मैंने कभी किसी से मंत्री पद नहीं मांगा.’
दरअसल, कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने वित्त विभाग अपने पास रखा है. रामलिंगा रेड्डी ने बेंगलुरु विकास विभाग के लिए जोरदार पैरवी की थी और विभाग न मिलने पर अपनी नाराजगी शिवकुमार को भी जाहिर की थी. बेंगलुरु के बीटीएम लेआउट से छह बार विधायक रह चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी के पास प्रशासनिक अनुभव के कई दशक हैं. उन्होंने इससे पहले गृह, परिवहन और हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्त जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली है. रामालिंगा ने ऐसे वक्त में इस्तीफा दिया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता राहुल गांधी भी आज यानी शुक्रवार को राज्य में ही मौजूद हैं.