उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने ऊधम सिंह नगर जिले में एक बड़े अभियान के तहत फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के इस्तेमाल और उनके अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। STF को आशंका है कि दूसरे राज्यों से जारी किए गए कई शस्त्र लाइसेंस फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनवाकर उत्तराखंड में वैध कराए गए थे। STF के आईजी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि गुप्त सूचनाओं के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि उत्तराखंड में इस्तेमाल हो रहे बड़ी संख्या में शस्त्र लाइसेंस दूसरे राज्यों से ट्रांसफर कराए गए थे और उनमें जालसाजी तथा नियमों के उल्लंघन की आशंका है।
इसी के तहत पिछले दो महीनों से STF विभिन्न राज्यों के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों और लाइसेंसिंग अधिकारियों से हजारों शस्त्र लाइसेंसों का रिकॉर्ड जुटाकर सत्यापन कर रही है। आईजी भरणे ने कहा कि लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि फर्जी आधार कार्ड और अन्य नकली दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस बनवाए जा रहे हैं। यहां तक कि कुछ लाइसेंस मृत व्यक्तियों के नाम पर या ऐसे लोगों के नाम पर बनाए गए, जिनके नाम पर कोई लाइसेंस अस्तित्व में ही नहीं था। बाद में इन लाइसेंसों को दूसरे राज्यों में ट्रांसफर कर स्थायी रूप से वैध कराया जाता था।
उन्होंने कहा, "उत्तराखंड STF ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया है। जिन राज्यों से ये लाइसेंस जारी हुए हैं, वहां के लाइसेंसिंग अधिकारियों के रजिस्टर और रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जांच में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना है।" STF ने इससे पहले भी फर्जी शस्त्र लाइसेंस से जुड़े दो अलग-अलग मामले दर्ज किए थे, जिनमें दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। एक कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से फर्जी शस्त्र लाइसेंस, अवैध सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए थे।
जांच के दौरान ऊधम सिंह नगर जिले में अवैध और फर्जी तरीके से प्राप्त किए गए शस्त्र लाइसेंसों से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। STF अब उन सभी लाइसेंसों की पड़ताल कर रही है जो दूसरे राज्यों से ट्रांसफर होकर उत्तराखंड के रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हैं। इससे पहले 22 मई को उत्तराखंड STF ने नकली दवाओं के निर्माण और बिक्री में शामिल एक गिरोह का भी भंडाफोड़ किया था। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
उत्तराखंड STF के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर नकली दवाओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान पता चला कि कई राज्यों से बड़ी मात्रा में दवाएं कूरियर के माध्यम से भेजी जा रही थीं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेची जा रही दवाओं की भी जांच की गई और संबंधित कंपनियों से संपर्क किया गया। एसएसपी अजय सिंह के अनुसार, इस मामले में साइबर थाने में केस दर्ज किया गया है। अब तक की जांच में पांच राज्यों में फैले नेटवर्क का पता चला है। गिरफ्तार आरोपी ने स्वीकार किया है कि वह कोटद्वार और भगवानपुर में नकली दवाओं का निर्माण करता था। मामले में आगे की जांच जारी है।