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हिंदू नववर्ष 2026- विक्रम संवत 2083 का भव्य आगाज, इस बार 12 नहीं 13 महीनों का होगा साल

भारतवर्ष में आज हिंदू नववर्ष 2026 यानी विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ हुआ। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाला यह नववर्ष न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और नवचेतना का प्रतीक भी माना जाता है। साथ ही आज यानी 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो गई है, जिसके चलते सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है।

सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने घरों में पूजा-अर्चना कर नए वर्ष की शुरुआत की और सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं, जिनमें श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों के साथ शामिल हुए। सड़कों पर केसरिया ध्वज लहराते हुए लोगों में जबरदस्त उत्साह नजर आया।

इस अवसर पर कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। देवी-देवताओं की झांकियां, भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन के जरिए लोगों को सनातन परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया गया। विक्रम संवत 2083 कई दृष्टियों से खास रहने वाला है। यह वर्ष नई ऊर्जा, सकारात्मक बदलाव और उन्नति का संकेत दे रहा है। व्यापार, शिक्षा और सामाजिक जीवन में नए अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसलिए इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। देश के कई हिस्सों में आज के दिन गुड़ी पड़वा का पर्व भी धूमधाम से मनाया जाता है। विक्रम संवत 2083 इस बार 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा। इसकी वजह है अधिकमास, जिसे इस बार ज्येष्ठ माह में जोड़ा गया है। यह अधिकमास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इस दौरान भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना का महत्व बढ़ जाता है। हालांकि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यवसाय जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इस संवत्सर का नाम ‘रौद्र’ रखा गया है, जिसमें बृहस्पति को राजा और मंगल को मंत्री का पद प्राप्त है।

इस वर्ष के 13 महीनों में चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, अधिक ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन शामिल हैं। हिंदू नववर्ष के पहले दिन धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है। संवत्सर पूजा कर ब्रह्मा जी सहित सभी देवी-देवताओं की विधिपूर्वक आराधना करें। मां दुर्गा की पूजा के लिए कलश स्थापना करें। घर के मुख्य द्वार पर ध्वज लगाना शुभ माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। सूर्योदय से पहले तिल के तेल और उबटन से स्नान (तैलाभ्यंग) करें। नदी या तालाब के किनारे पूजा कर दान-दक्षिणा देने का भी विशेष महत्व है।

इस दिन व्रत रखकर सूर्य देव की उपासना और भगवान शिव के दर्शन करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहता है। इन बातों का विशेष ध्यान रखें। तामसिक भोजन से परहेज करें। किसी से विवाद या झगड़ा न करें। उधार लेने-देने से बचें। किसी का अपमान न करें। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। कुल मिलाकर, हिंदू नववर्ष का पहला दिन नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है।