केंद्र सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ देने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। सरकार दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा, मातृत्व सहायता और बुजुर्गों के लिए सुरक्षा जैसी सुविधाएं लागू करने की तैयारी में है। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म कंपनियों को 22 जून तक अपने कर्मचारियों का डेटा ई-श्रम पोर्टल से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के संयुक्त सचिव और महानिदेशक (श्रम कल्याण) अशुतोष पेडणेकर ने कहा कि सरकार सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों को लागू करने और गिग वर्कर्स के लिए विशेष तंत्र विकसित करने पर काम कर रही है। पेडणेकर ने कहा कि वर्तमान में देश में लगभग एक करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स काम कर रहे हैं और इस दशक के अंत तक यह संख्या 2.5 करोड़ तक पहुंच सकती है। उन्होंने इस क्षेत्र को देश के लिए “रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण” बताया।
उन्होंने बताया कि सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड को सक्रिय करने की मंजूरी दे दी है। यह बोर्ड श्रमिकों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर काम करेगा। सरकार सामाजिक सुरक्षा कोष भी शुरू कर रही है, जिसके जरिए गिग वर्कर्स के लिए विभिन्न योजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाएगी। प्रस्तावित सुविधाओं में दुर्घटना बीमा, वृद्धावस्था सुरक्षा, स्वास्थ्य लाभ, मातृत्व लाभ, नकद सहायता, शिक्षा ऋण और अंतिम संस्कार सहायता जैसी योजनाएं शामिल हैं।
सरकार फिलहाल इन योजनाओं के क्रियान्वयन का ढांचा तैयार कर रही है और इसके लिए फंड मैनेजरों के साथ चर्चा जारी है। पेडणेकर ने कहा कि सरकार श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा की मांग और उद्योग जगत की लचीलेपन की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा प्लेटफॉर्म कंपनियों के डेटाबेस को ई-श्रम पोर्टल से जोड़ना है, ताकि श्रमिकों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। उन्होंने कहा कि ई-श्रम और कंपनियों के डेटाबेस आपस में जुड़ेंगे, जिससे लाभ वितरण और निगरानी आसान होगी। सरकार ने सभी प्लेटफॉर्म कंपनियों से 22 जून तक ई-श्रम पोर्टल से जुड़ने की प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। श्रम मंत्रालय का कहना है कि गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था देश में रोजगार का बड़ा स्रोत बनकर उभर रही है, खासकर युवाओं के लिए।