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पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने किया सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है. भारतीय जनता पार्टी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल करते हुए 200 से ज्यादा सीटें जीत ली हैं. दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है. सबसे बड़ा झटका खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगा, जो अपनी सीट भी नहीं बचा सकीं. चुनाव परिणाम आने के बाद अब ममता बनर्जी ने बड़ा राजनीतिक और कानूनी कदम उठाने का फैसला किया है. तृणमूल कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह पूरे चुनाव परिणाम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी. पार्टी का आरोप है कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई और जनादेश को चुराया गया. 

बुधवार को कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर ममता बनर्जी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के साथ अहम बैठक की. इसी बैठक में चुनाव परिणाम के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया गया. बैठक में ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही और कई स्तरों पर गड़बड़ी की गई. टीएमसी नेताओं के अनुसार, पार्टी जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव नतीजों की न्यायिक समीक्षा की मांग करेगी.

बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने साफ कहा कि वह तुरंत इस्तीफा नहीं देंगी. उन्होंने अपने इस फैसले को लोकतंत्र बचाने का विरोध बताया. ममता का कहना है कि जब तक चुनावी धांधली के आरोपों की जांच नहीं होती, तब तक वह अपने पद से हटने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जनादेश को जबरन प्रभावित किया गया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया गया. उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि आमतौर पर चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री इस्तीफा दे देते हैं.

टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी पार्टी नेताओं और विधायकों से अपने पदों पर बने रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि पार्टी इस चुनाव को वैध नहीं मानती और कानूनी लड़ाई पूरी ताकत से लड़ी जाएगी. अभिषेक ने विधायकों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहें और जनता के बीच मौजूद रहें. साथ ही उन्होंने चुनाव के बाद की हिंसा को रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की भी अपील की.

बैठक में राष्ट्रपति शासन का मुद्दा भी उठा. ममता बनर्जी ने कहा कि अगर केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहती है तो उसे इसकी जिम्मेदारी लिखित रूप में लेनी होगी. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि केंद्र सरकार की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

ममता बनर्जी और उनकी पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य कानूनी लड़ाई को मजबूत करने के लिए फिर से वकालत का काम शुरू कर सकती हैं. पार्टी इस पूरे मामले को केवल राज्य की राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की लोकतांत्रिक लड़ाई के रूप में पेश करना चाहती है. टीएमसी का मानना है कि यह संघर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी गठबंधन को एकजुट करने में भी मदद कर सकता है.

विरोध के प्रतीक के तौर पर ममता बनर्जी ने 9 मई को राज्यभर के टीएमसी कार्यालयों में रवींद्र संगीत बजाने का सुझाव दिया है. इसी दिन कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नई सरकार के शपथ ग्रहण कार्यक्रम की तैयारी चल रही है. टीएमसी इसे लोकतांत्रिक प्रतिरोध का सांस्कृतिक संदेश बता रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर टीएमसी सुप्रीम कोर्ट जाती है तो बंगाल चुनाव विवाद राष्ट्रीय बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है. हालांकि अदालत में चुनाव नतीजों को चुनौती देना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए ठोस सबूत और कानूनी आधार जरूरी होंगे. फिलहाल बंगाल में भाजपा सरकार बनाने की तैयारी कर रही है, जबकि टीएमसी चुनावी हार को कानूनी और राजनीतिक लड़ाई में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है.