Breaking News

दिल्ली: MCD उपचुनाव में सुबह 9:30 बजे तक 5.4 प्रतिशत मतदान हुआ     |   दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता सूचकांक में मामूली सुधार, सुबह 7 बजे 270 दर्ज हुआ AQI     |   MCD उपचुनाव के लिए वोटिंग जारी, 12 वार्डों में AAP-BJP की सीधी टक्कर     |   साइक्लोन दित्वाह: तमिलनाडु और पुडुचेरी के कई जिलों में हो सकती है तेज बारिश, IMD का अलर्ट     |   नेशनल हेराल्ड केस में नई FIR दर्ज, राहुल और सोनिया गांधी पर आपराधिक साजिश का आरोप     |  

मशहूर तबला वादक और संगीतकार उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन

मौसिकी की दुनिया में जिनके तबले की थाप एक अलहदा पहचान रखती है, वो उस्ताद जाकिर हुसैन नहीं रहे। 73 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में सोमवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उस्ताद जाकिर हुसैन को रविवार रात को अमेरिका के एक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उन्हें रक्तचाप की समस्या थी। उस्ताद जाकिर हुसैन उस्ताद अल्ला रक्खा खां के पुत्र थे। तबले की तालीम उन्होंने पिता से ही ली थी। उस्ताद जाकिर हुसैन की शख्सियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज 11 साल की उम्र में अमेरिका में पहला कॉन्सर्ट किया। यानी तकरीबन 62 साल तक उनका और तबले का साथ नहीं छूटा। उन्होंने तीन ग्रैमी अवॉर्ड जीते। पद्म विभूषण से भी नवाजे गए। तबले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने में उनका अहम योगदान रहा।

संगीत की दुनिया में मिले कई पुरस्कार
जब तबले का जिक्र आता है तो सबसे बड़े नामों में उस्ताद जाकिर हुसैन का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने न सिर्फ अपने पिता उस्ताद अल्ला रक्खा खां की पंजाब घराने (पंजाब बाज) की विरासत को आगे बढ़ाया, बल्कि तबले के शास्त्रीय वादन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ले गए। उस्ताद को संगीत की दुनिया का सबसे बड़ा ग्रैमी अवॉर्ड 1992 में 'द प्लेनेट ड्रम' और 2009 में 'ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट' के लिए मिला। इसके बाद 2024 में उन्हें तीन अलग-अलग संगीत एलबमों के लिए एकसाथ तीन ग्रैमी मिले। 1978 में जाकिर हुसैन ने कथक नृत्यांगना एंटोनिया मिनीकोला से शादी की थी। उनकी दो बेटियां हैं, अनीसा कुरैशी और इसाबेला कुरैशी। 

फिल्मों में भी अभिनय किया
1983 में जाकिर हुसैन ने फिल्म 'हीट एंड डस्ट' से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा। इसके बाद 1988 में 'द परफेक्ट मर्डर', 1992 में 'मिस बैटीज चिल्डर्स' और 1998 में 'साज' फिल्म में भी उन्होंने अभिनय किया।

उस्ताद जाकिर हुसैन का जन्म और करियर 

उस्ताद जाकिर हुसैन का जन्म मुंबई में 9 मार्च 1951 को हुआ था। वह एक बेहतरीन तबलावादक की नहीं बल्कि एक संगीतकार और शिक्षक भी रहे। उनके पिता और गुरु उस्ताद अल्ला रक्खा खुद एक महान तबला वादक थे। छोटी उम्र से ही जाकिर हुसैन संगीत में रुचि रखते हैं। 12 वर्ष की उम्र में पेशेवर रूप में उन्होनें प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। उन्होनें शास्त्रीय संगीत और फ्यूजन शैलियों दोनों में काम किया है। उन्हें तबले का बादशाह भी कहा जाता है।