उत्तराखंड सरकार ने हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान सिख श्रद्धालुओं के एक समूह और स्थानीय निवासियों के बीच हुई हालिया घटना को किसी भी स्थिति में धार्मिक विवाद के रूप में नहीं देखने की अपील की है। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि मामले को सांप्रदायिक रंग देने या भ्रामक प्रचार करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य के गृह सचिव शैलेश बगोली ने शनिवार को कहा कि प्रारंभिक जांच के आधार पर यह मामला धार्मिक नहीं, बल्कि दो पक्षों के बीच भावनात्मक प्रतिक्रिया और आपसी मतभेदों से उत्पन्न विवाद प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सभी धर्मों और आस्थाओं का समान सम्मान करता है और राज्य की सांस्कृतिक विरासत हमेशा से सद्भाव, शांति और पारस्परिक सम्मान पर आधारित रही है। सरकार किसी भी कीमत पर इस सौहार्दपूर्ण वातावरण को बिगड़ने नहीं देगी। गृह सचिव ने बताया कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए गढ़वाल क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को निर्देश दिए गए हैं। सभी पक्षों की बात सुनने के बाद तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कानून-व्यवस्था के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) को घटना की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए सरकार शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत कर रही है। इसके तहत मौजूदा चारधाम सेल को हेमकुंड साहिब यात्रा से भी जोड़ा जाएगा। यह व्यवस्था यात्रा अवधि के दौरान 24 घंटे (24x7) संचालित रहेगी। शैलेश बगोली ने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाकर घटना को सांप्रदायिक रूप देने और देवभूमि उत्तराखंड के शांतिपूर्ण माहौल को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अफवाह, झूठी सूचना या सामाजिक वैमनस्य फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने दोहराया कि उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन सभी श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। किसी भी अप्रिय घटना या विवाद का समाधान कानून के अनुसार किया जाएगा और किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। गृह सचिव ने श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों और सभी संबंधित पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी शिकायत या विवाद की स्थिति में सरकार और पुलिस द्वारा स्थापित कानूनी एवं प्रशासनिक तंत्र की सहायता लें।